Sawan 2026 Parthiv Shivling: आखिर सावन में क्यों खास है मिट्टी के शिवलिंग की पूजा? केवल बेलपत्र पर ऐसे रखें मिट्टी का शिवलिंग, फिर देखें असर!

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Sawan 2026 Parthiv Shivling: श्रावण मास में पत्थर और पारे से भी करोड़ों गुना शक्तिशाली है मिट्टी का शिवलिंग? जान लें पूजा का महत्व, नियम और बेलपत्र पर स्थापना की सम्पूर्ण विधि..

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  • Publish Date - July 29, 2026 / 04:25 PM IST,
    Updated On - July 29, 2026 / 04:25 PM IST

Sawan 2026 Parthiv Shivling/Image Credit: ScreenGrab / AI Generated / @Grok

HIGHLIGHTS
  • घर पर ऐसे बनाएं मिट्टी का शिवलिंग!
  • एक मुट्ठी मिट्टी से चमकेगी किस्मत!

Sawan 2026 Parthiv Shivling: हिन्दू धर्म में सावन (श्रावण) का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण काल माना जाता है। इस दौरान शिवभक्त कई प्रकार से पूजा-अर्चना करते हैं, जिसमें पार्थिव शिवलिंग (मिटटी से बना शिवलिंग) का पूजन एवं निर्माण अत्यंत महत्वपूर्ण और फलदायी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, कलयुग में भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने का यह सबसे आसान और उत्तम साधन है। सावन में इस पूजा को करने से भक्तों के सभी रोग और पाप दूर हो जाते हैं और उनकी हर मनोकामना पूरी होती है।

सावन 2026: पार्थिव शिवलिंग पूजा का धार्मिक महत्व और पौराणिक इतिहास !

‘पार्थिव’ का मतलब है “मिट्टी से बना हुआ”। यह शिवलिंग हमें सिखाता है कि हमारा जीवन हमेशा रहने वाला नहीं है, बल्कि सिर्फ ईश्वर ही अमर हैं। यह शिवलिंग हमें याद दिलाता है कि एक दिन सब कुछ मिट्टी में मिल जाना है, इसलिए हमें अपना घमंड छोड़कर भगवान के चरणों में पूरी तरह समर्पित हो जाना चाहिए।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सबसे पहले भगवान श्रीराम ने पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा की थी। लंका पर विजय हासिल करने और समुद्र पर सेतु (पुल) बनाने से पहले, उन्होंने समुद्र तट पर बालू-रेत (मिट्टी) से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की आराधना की थी। इस बात का विशेष ज़िक्र शिव पुराण में भी मिलता है।

सावन के महीने में मिट्टी का शिवलिंग क्यों बनाते हैं?

मिट्टी (पृथ्वी तत्व) से बना शिवलिंग सबसे पवित्र एवं शुद्ध माना जाता है। पत्थर या पारे के शिवलिंग के मुक़ाबले मिट्टी का शिवलिंग अधिक दिव्य और असरदार होता है। जब भक्त खुद अपने हाथों से मिट्टी गूंथकर शिवलिंग बनाता है, तो उसका भगवान से जुड़ाव और भी ज्यादा गहरा हो जाता है। यह शिवलिंग सृष्टि के जन्म, जीवन और अंत के चक्र को भी दर्शाता है।

पूजा पूरी होने के पश्चात इस शिवलिंग को पानी में विसर्जित कर दिया जाता है। इससे हमें यह सीख मिलती है कि संसार में कुछ भी स्थायी नहीं हैं, केवल भगवान शिव ही शाश्वत हैं। कलयुग के इस दौर में जब चारों तरफ परेशानियां हैं, तब पार्थिव शिवलिंग की पूजा हर भक्त के लिए सबसे आसान रास्ता है। कोई भी पुरुष या महिला इसे घर पर आसानी से बनाकर पूजा कर सकता है। सावन में पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से कई लाभ होते हैं। आइये जानतें हैं पार्थिव शिवलिंग से मिलने वाले लाभ के बारे में..

Parthiv Shivling: पार्थिव शिवलिंग के मुख्य, धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ!

  • शास्त्रों के अनुसार, कलयुग में मिट्टी के शिवलिंग की पूजा करने से जाने-अनजाने हुए सभी पाप मिट जाते हैं और जीवन में सुख-शांति व समृद्धि आती है।
  • यह पूजा अकाल मृत्यु के भय को दूर करती है और गंभीर रोगों से बचाती है।
  • घर आँगन में खुशियाँ व संतान सुख से भर देती है।
  • ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से रोज यह पूजा करने वाले भक्त पर इस लोक और परलोक, दोनों जगह शिव जी की कृपा बनी रहती है।
  • जो भी व्यक्ति सही विधि से पार्थिव पूजन करता है, उसे मृत्यु के बाद लंबे समय तक स्वर्ग का सुख मिलता है।

पार्थिव शिवलिंग बनाने के ज़रूरी नियम!

शास्त्रों के अनुसार, पार्थिव शिवलिंग बनाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है, नहीं तो पूजा का पूरा फल नहीं मिलता। आइए जानते हैं वे नियम क्या हैं:

  • सही मिट्टी चुनें: सबसे पहले साफ और पवित्र मिट्टी लें। किसी पवित्र नदी, तालाब, तुलसी या बेल के पेड़ के नीचे की मिट्टी सबसे अच्छी होती है। अगर यह न मिले, तो घर में लगे तुलसी या बेल के गमले की साफ मिट्टी का उपयोग भी कर सकते हैं।
  • मिट्टी की शुद्धि: मिट्टी को गंगाजल, गाय के दूध, गोबर, भस्म और चंदन मिलाकर पवित्र करें। कुछ लोग इसमें गुड़ और मक्खन भी मिलाते हैं।
  • सही दिशा: शिवलिंग बनाते और पूजा करते समय आपका मुँह हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए।
  • सही आकार: शिवलिंग का आकार आपके अंगूठे के बराबर से लेकर ज्यादा से ज्यादा 12 अंगुल (लगभग 9 इंच) तक ही होना चाहिए। इससे बड़ा शिवलिंग नहीं बनाना चाहिए।
  • उसी दिन विसर्जन: यह शिवलिंग सिर्फ एक दिन के लिए होता है। इसे उसी दिन बनाएं, पूजा करें और जल में विसर्जित कर दें। इसे अगले दिन के लिए घर में रखना मना है।
  • सच्चा भाव: पूरी पूजा साफ मन और बिना किसी लालच के, भगवान के प्रति सच्चे समर्पण के साथ करें।

Belpatra Parthiv Shivling Puja: बेलपत्र पर पार्थिव शिवलिंग कैसे स्थापित करें?

बेलपत्र पर मिट्टी का शिवलिंग रखकर पूजा करना बहुत जल्दी फल देता है। बेलपत्र शिव जी को बहुत पसंद है और जब मिट्टी के साथ इसका मेल होता है, तो महादेव बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। इसकी विधि इस प्रकार है:

  • अखंडित बेलपत्र: इसके लिए सबसे पहले एक सुंदर, स्वच्छ और बिना कटा-फटा तीन पत्तों वाला बेलपत्र लें।
  • स्थापना की दिशा: पूजा की चौकी पर बेलपत्र को इस प्रकार रखें कि उसकी डंडी का मुख दक्षिण दिशा की ओर हो और बीच वाली मुख्य पत्ती उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रहे।
  • शिवलिंग बनाना: पूर्व दिशा की तरफ मुँह करके बैठें। अब शुद्ध की हुई मिट्टी से एक छोटा सा शिवलिंग बनाकर उसे बेलपत्र की बीच वाली पत्ती के ऊपर रख दें।
  • जलाधारी बनाना: अगर हो सके तो शिवलिंग के साथ मिट्टी की छोटी जलाधारी भी बनाएं, जिसकी ढलान (पानी गिरने का रास्ता) उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए।
  • शिवलिंग को साक्षात परमेश्वर मानकर उनका सुंदर श्रृंगार करें।

इसके बाद पूरी विधि-विधान से पूजा शुरू करें। जैसे भगवान गणेश, विष्णु जी, नवग्रह और माता पार्वती का ध्यान करें। फिर षोडशोपचार पूजा (सोलह सामग्रियों से पूजा) और पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, चंदन, अक्षत (चावल), फूल, धूप, दीपक और आरती अर्पित करें। पूजा के दौरान मन ही मन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें।

Disclaimer:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है। IBC24.in लेख में उल्लेखित किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पँहुचाना है।

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क्या पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए किसी भी मिट्टी का उपयोग किया जा सकता है?

नहीं, शास्त्रों के अनुसार पूजा के लिए केवल शुद्ध और पवित्र मिट्टी का ही चयन करना चाहिए। किसी पवित्र नदी, तालाब, तुलसी या बेलपत्र के पेड़ के नीचे की मिट्टी सबसे उत्तम मानी जाती है। गंदे स्थानों या पैरों के नीचे आने वाली मिट्टी का उपयोग पूरी तरह वर्जित है।

क्या महिलाएं और कुंवारी कन्याएं भी घर पर पार्थिव शिवलिंग बना और पूज सकती हैं?

हाँ, शिव पुराण के अनुसार जाति, मत या लिंग के भेद के बिना कोई भी व्यक्ति (पुरुष, महिला या कन्या) पूरी श्रद्धा और शुद्ध भाव के साथ घर पर ही पार्थिव शिवलिंग का निर्माण और पूजन कर सकता है।

पूजा के बाद पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन कब और कहाँ करना चाहिए?

पार्थिव शिवलिंग की आयु केवल एक दिन की होती है। शास्त्रों के अनुसार, उसी दिन पूजा संपन्न होने के तुरंत बाद इसे किसी पवित्र नदी, तालाब या घर के ही किसी साफ गमले में जल डालकर विसर्जित कर देना चाहिए। इसे अगले दिन के लिए घर में रखना मना है।

पार्थिव शिवलिंग का आकार कितना बड़ा होना चाहिए?

घर पर पूजा के लिए पार्थिव शिवलिंग का आकार बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए। शास्त्रों के मुताबिक, इसका आकार हाथ के अंगूठे के बराबर से लेकर अधिकतम 12 अंगुल (लगभग 9 इंच) तक ही होना चाहिए।

मिट्टी में दूध, भस्म और चंदन क्यों मिलाया जाता है?

यह मिट्टी के शोधन (शुद्धिकरण) की प्रक्रिया है। पृथ्वी तत्व को दिव्य और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर बनाने के लिए उसमें गंगाजल, गाय का दूध, गोबर, भस्म और चंदन मिलाया जाता है, जिससे शिवलिंग अत्यंत पवित्र और पूजनीय बनता है।