एआईएफएफ ने प्रभाकरण की बर्खास्तगी पर चर्चा के लिए मंगलवार को बैठक बुलाई

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एआईएफएफ ने प्रभाकरण की बर्खास्तगी पर चर्चा के लिए मंगलवार को बैठक बुलाई

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  • Publish Date - January 28, 2024 / 03:56 PM IST,
    Updated On - January 28, 2024 / 03:56 PM IST

नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने महासचिव शाजी प्रभाकरण की बर्खास्तगी पर चर्चा के लिए मंगलवार को कार्यकारी समिति की बैठक बुलाई है।

 उच्च न्यायालय द्वारा हालांकि उनकी बर्खास्तगी पर रोक लगाने के आदेश के बावजूद उन्हें आमंत्रित किये जाने की संभावना नहीं है।

बैठक के एजेंडे में एक विषय का उल्लेख है, ‘‘ महासचिव के पद से डॉ. शाजी प्रभाकरण की बर्खास्तगी और सेवा समाप्ति।’’

प्रभाकरण ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘नहीं, मुझे एआईएफएफ की मंगलवार की कार्यकारी समिति की बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं वहां रहना चाहता था और इस मामले में अपना पक्ष प्रस्तुत करना चाहता था। मैंने सदस्यों को एक पत्र भी लिखा था लेकिन फिर भी मुझे आमंत्रित नहीं किया गया।’’

प्रभाकरण को सात नवंबर को ‘विश्वासघात’ करने के आरोप में महासचिव पद से हटा दिया गया था, लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने आठ दिसंबर को उनकी बर्खास्तगी पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया था।

अदालत ने 19 जनवरी के अपने नवीनतम आदेश में कहा था कि प्रभाकरण को एआईएफएफ की आपातकालीन समिति ने बर्खास्त कर दिया था, जबकि महासंघ के संविधान में यह प्रावधान है कि केवल कार्यकारी समिति के पास ही ऐसा करने की शक्ति है।

प्रभाकरण अपने पत्र में कहा कि वह अब भी एआईएफएफ के महासचिव हैं और उन्हें अपना पक्ष समझाने के लिए बैठक में आमंत्रित किया जाना चाहिए।

प्रभाकरण ने कार्यकारी समिति के सदस्यों को संबोधित पत्र में लिखा, ‘‘आप सभी से मेरा विनम्र अनुरोध है कि मुझे एआईएफएफ सदस्यों की अगली बैठक में आमंत्रित किया जाए। चाहे वह कार्यकारी समिति की बैठक हो या वार्षिक आम बैठक (या, उस मामले के लिए, कोई अन्य औपचारिक या अनौपचारिक बैठक), या आगे किसी और बैठक की योजना बनायी जा रही हो।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं ईमानदारी से हर उस सवाल का जवाब देना चाहूंगा जो हमारे माननीय सदस्यों के मन में हो या उन चीजों पर हो जहां उन्हें बताया गया हो कि मैंने कुछ गलत किया है।’’

प्रभाकरण ने कहा, ‘‘मैं अब भी एआईएफएफ का महासचिव हूं और इस पद पर रहने के कारण वहां रहना मेरा अधिकार है। उन सभी सदस्यों को मेरा पक्ष सुनना चाहिए, जिन्होंने मुझे ये महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।’’

दक्षिण मध्य एशिया के लिए फीफा के पूर्व विकास अधिकारी और दिल्ली फुटबॉल के पूर्व अध्यक्ष प्रभाकरण ने कहा कि वह अपने जीवन में कभी किसी अनियमितता का हिस्सा नहीं रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई बिना किसी सबूत के गैर-जिम्मेदाराना और बिल्कुल झूठे आरोप लगाकर मेरी विश्वसनीयता को खत्म करना चाहता है, तो क्या आपको लगता है कि मुझे दूर रहकर ऐसा होने देना चाहिए?’’

उन्होंने 24 दिसंबर को लिखे इस पत्र में कहा, ‘‘ मेरे लिए फुटबॉल मेरा जीवन और भगवान है। ’’

भाषा आनन्द नमिता

नमिता