… अपराजिता उपाध्याय …
ग्रेटर नोएडा, छह जनवरी (भाषा) ओलंपियन आशीष चौधरी को उनके शुरुआती मुकाबले में अयोग्य घोषित किए जाने के बाद राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप में रेफरी के फैसलों पर सवाल खड़े हो गए हैं। भारतीय मुक्केबाजी महासंघ ने मामले की समीक्षा के आदेश दिए हैं। पुरुष लाइटवेट वर्ग (80 किग्रा) में मुकाबला कर रहे 2019 एशियाई चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता आशीष को सोमवार को मुकाबले के दो मिनट से भी कम समय में अयोग्य ठहरा दिया गया। यह फैसला इस आधार पर लिया गया कि उन्होंने हरियाणा के रूपेश से जानबूझकर सिर टकराया, जिससे रूपेश को चोट लग गई और खून बहने लगा। रेफरी ने शुरुआत में इसे अनजाने में हुई घटना करार देते हुए रूपेश को स्टैंडिंग काउंट दिया। जिसके बाद सहायता के लिए चिकित्सा टीम को बुलाया गया। तकनीकी प्रतिनिधि से सलाह के बाद हालांकि इस फैसले को पलट दिया गया और आशीष को अयोग्य करार दिया गया। इस फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश के मुक्केबाज आशीष ने विरोध दर्ज कराया और आधिकारिक शिकायत भी दायर की। इसके बाद बीएफआई ने मामले की समीक्षा शुरू की और संबंधित रेफरी को एक दिन के लिए ड्यूटी से हटा दिया। बीएफआई के कार्यकारी निदेशक कर्नल अरुण मलिक ने ‘पीटीआई’ से कहा, ‘‘हमने तकनीकी प्रतिनिधि से मामले की जांच करने को कहा है। हम उस समय हुई घटना के तथ्यों की जांच कर रहे थे, इसलिए रेफरी को उस दिन कोई ड्यूटी नहीं दी गई। बाद में रेफरी को फिर से रोस्टर में शामिल कर लिया गया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ रेफरी का बयान लेने के बाद तकनीकी प्रतिनिधि ने एक रिपोर्ट तैयार की, जिसमें कहा गया कि फैसला विश्व मुक्केबाजी के तकनीकी नियमों के अनुसार लिया गया था और यह निष्पक्ष निर्णय था।’’ आशीष कहा कि यह पूरी से से अनजाने में हुआ था। उन्होंने कहा, ‘‘ जो भी वीडियो देख रहा है, वह मान रहा है कि मैंने जानबूझकर सिर नहीं मारा। मैं पंच मारकर पीछे हट रहा था और उसी दौरान सिर टकरा गया। क्या एक ओलंपियन के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है?’’ इस फैसले का हिमाचल प्रदेश मुक्केबाजी संघ (एचपीबीए) ने भी कड़ा विरोध किया है। एचपीबीए अध्यक्ष और बीएफआई के उपाध्यक्ष राजेश भंडारी ने कहा, ‘‘हम इस फैसले की कड़ी निंदा करते हैं और विरोध जताते हैं। अगर वीडियो देखें तो रेफरी ने खुद संकेत दिया था कि यह घटना आकस्मिक थी।’’ बीएफआई राष्ट्रीय चैंपियनशिप का लाइव स्ट्रीमिंग कर रहा है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि आशीष के मुकाबले का वीडियो महासंघ के यूट्यूब पेज से हटा दिया गया है। इस पूरे प्रकरण ने मुक्केबाजी जगत में तकनीकी अधिकारी की योग्यता को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर कहा, ‘‘ नरेंद्र निरवान खुद एक योग्य तकनीकी अधिकारी नहीं हैं। उन्हें वहां बैठना ही नहीं चाहिए था। वे ऐसे फैसले कैसे ले सकते हैं?’’ पूर्व विश्व चैंपियन स्वीटी बूरा ने भी तोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन से करीबी मुकाबले में हार के बाद रेफरी पर सवाल उठाए। स्वीटी शुरुआती दौर के बाद 4-1 से आगे थीं, लेकिन उन्हें 2-3 से हार का सामना करना पड़ा। स्वीटी ने कहा, ‘‘ मैं लगातार जवाबी पंच लगा रही थी। मेरे हिसाब से लवलीना को तीन काउंट देने के बाद मुकाबला पहले राउंड में ही खत्म हो जाना चाहिए था, लेकिन मैच तीन राउंड तक गया।” उन्होंने कहा, ‘‘जब कोई पदक विजेता होता है तो जज पर भी दबाव होता है। मुझे लगा था कि फैसला 5-0 से मेरे पक्ष में आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वह सटीक जगह पंच नहीं लगा पा रही थी।’’ उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, ‘‘अगर खिलाड़ियों को मौका ही नहीं दिया जाएगा तो और पदक विजेता कैसे निकलेंगे?’’ भाषा आनन्द आनन्द