GDP growth projected at 7.4% in 2025-26
नयी दिल्ली: GDP Growth Rate , अमेरिकी शुल्क वृद्धि और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के वित्त वर्ष 2025-26 में 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। इस तरह भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। बुधवार को आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह भारतीय रिजर्व बैंक के 7.3 प्रतिशत के अनुमान और सरकार के 6.3–6.8 प्रतिशत वृद्धि के शुरुआती आकलन से अधिक है। भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2024-25 में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी।
GDP Growth Rate of India, घरेलू अर्थव्यवस्था का बेहतर प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया हुआ है। इसकी वजह से व्यापार तनाव बढ़ा है और कुछ प्रमुख निर्यात क्षेत्रों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इन चुनौतियों के बीच, मोदी सरकार ने जीएसटी ढांचे में व्यापक बदलाव, सैकड़ों वस्तुओं पर कर दरों में कटौती, श्रम सुधारों के क्रियान्वयन और आयकर बोझ में राहत देकर आर्थिक गतिविधियों को गति दी है। इसके अलावा ब्याज दरों में कटौती, कम महंगाई और मजबूत ग्रामीण मांग ने भी इसमें सहयोग दिया है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पिछले महीने अनुमान जताया था कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.6 प्रतिशत रह सकती है, जो वित्त वर्ष 2026-27 में घटकर 6.2 प्रतिशत रह जाएगी। यह अनुमान अमेरिका-भारत व्यापार समझौते में देरी की आशंका को ध्यान में रखते हुए लगाया गया है।
GDP Growth Rate of India, गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2023-24 में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 9.2 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की थी। मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की तरफ से जारी राष्ट्रीय आय के प्रथम अग्रिम अनुमानों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) की वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो एक साल पहले 6.4 प्रतिशत थी।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, विनिर्माण क्षेत्र में जीवीए वृद्धि दर वित्त वर्ष 2025-26 में सात प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो 2024-25 में 4.5 प्रतिशत थी। वहीं, सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 9.1 प्रतिशत आंकी गई है, जो पिछले वर्ष 7.2 प्रतिशत रही थी।
हालांकि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की वृद्धि दर घटकर 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो एक साल पहले 4.6 प्रतिशत थी। एनएसओ ने कहा कि स्थिर कीमतों पर वास्तविक जीडीपी 2025-26 में बढ़कर 201.90 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि 2024-25 में यह 187.97 लाख करोड़ रुपये थी।
वहीं, मौजूदा कीमतों पर जीडीपी का आकार 2025-26 में आठ प्रतिशत बढ़कर 357.14 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो 2024-25 में 330.68 लाख करोड़ रुपये थी। हालांकि सरकार ने फरवरी 2025 में पेश किए गए केंद्रीय बजट में 10.1 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया था।
प्रथम अग्रिम अनुमानों का इस्तेमाल आम तौर पर केंद्रीय बजट की तैयारी में किया जाता है। वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट एक फरवरी को पेश किए जाने की संभावना है। अमेरिकी डॉलर के लिहाज से भारत की जीडीपी वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 3.97 लाख करोड़ डॉलर रहने का अनुमान है। इसके लिए एक डॉलर का मूल्य 90 रुपये आंका गया है। एनएसओ का यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक के 7.3 प्रतिशत वृद्धि के अनुमान से थोड़ा अधिक है।
आंकड़ों के मुताबिक, निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) की वास्तविक वृद्धि सात प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि सकल स्थिर पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
रेटिंग एजेंसी इक्रा के वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने इन आंकड़ों पर कहा कि गैर-कर राजस्व में बजट से अधिक प्राप्तियों और व्यय में संभावित बचत को देखते हुए सरकार के राजकोषीय घाटे के 4.4 प्रतिशत के लक्ष्य से भटकने की आशंका नहीं है। क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि इन आंकड़ों से पता चलता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की वृद्धि गति बनी हुई है।