अस्मिता ने एशियाई खेलों में जापान का मुकाबला करने के लिए अपनी तकनीक को निखारा

अस्मिता ने एशियाई खेलों में जापान का मुकाबला करने के लिए अपनी तकनीक को निखारा

अस्मिता ने एशियाई खेलों में जापान का मुकाबला करने के लिए अपनी तकनीक को निखारा
Modified Date: September 10, 2026 / 11:40 am IST
Published Date: September 10, 2026 11:40 am IST

(अंकित श्रेष्ठ)

नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने कहा कि आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों में मेजबान जापान की कड़ी चुनौती का सामना करने लिए वह अपनी पकड़, पिन और सबमिशन तकनीक को और बेहतर बनाने की कोशिश कर रही हैं।

अस्मिता ने कहा कि उन्होंने ‘ग्राउंड फाइटिंग’ के तीनों पहलुओं में महारत हासिल करने के लिए काफी समय बिताया है क्योंकि एशियाई खेलों में ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों की तुलना में अधिक कड़ी चुनौती मिलेगी। अस्मिता राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय जूडोका बनी थीं।

अस्मिता ने पीटीआई वीडियो से कहा, ‘‘राष्ट्रमंडल खेलों की तुलना में एशियाई खेलों में मुझे अधिक कड़ी चुनौती का सामना करना होगा। इन खेलों में दुनिया के कुछ सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भाग ले रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जूडो में जापान का दबदबा रहा है और उनकी कड़ी चुनौती का सामना करना आसान नहीं होगा। मुझे अपने ने-वाज़ा (जूडो की एक तकनीकी) पर काम करने की जरूरत है क्योंकि अगर मैं फाइनल में पहुंचती हूं, तो मेरा प्रतिद्वंदी संभवतः जापानी ही होगा। उनकी ने-वाज़ा बहुत मजबूत है।’’

ने-वाज़ा से तात्पर्य जूडो मुकाबले के उस चरण से है जो जमीन पर लड़ा जाता है, जहां एथलीट ओसाकोमी-वाज़ा, या पकड़ने और पिन करने की तकनीकों के माध्यम से अपने विरोधी को नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं। साथ ही सबमिशन तकनीकों के साथ मुकाबले को समाप्त करने के अवसरों की तलाश में रहते हैं।

अस्मिता जापान के सबसे बड़े जूडो सितारों में से एक उता आबे से प्रेरणा ले रही हैं, जिनकी तकनीक और शैली ने विशेष रूप से भारतीय खिलाड़ी को प्रभावित किया है। 26 वर्षीय आबे महिलाओं के 52 किलोग्राम वर्ग में मौजूदा विश्व चैंपियन और पांच बार की विश्व चैंपियन हैं।

उन्होंने 2025 विश्व जूडो चैंपियनशिप में अपना पांचवां विश्व खिताब जीता था और वह इसी भार वर्ग में तोक्यो ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता भी हैं।

अस्मिता ने कहा, ‘‘मैं उता आबे से बहुत प्रेरणा लेती हूं। मुझे एक जूडोका के रूप में वह बहुत पसंद हैं। वह ओलंपिक चैंपियन और कई बार विश्व चैंपियन भी रह चुकी हैं। उनके भाई भी जूडोका हैं। मुझे उनकी तकनीक और खेल शैली बहुत पसंद है।’’

आबे की सफलता ने उन्हें जापानी जूडो के सबसे प्रसिद्ध चेहरों में से एक बना दिया है। उन्होंने और उनके बड़े भाई हिफुमी आबे ने तोक्यो ओलंपिक खेलों में एक ही दिन स्वर्ण पदक जीते थे। ऐसा कारनामा करने वाले दुनिया के पहले भाई-बहन हैं। अस्मिता हालांकि इस चुनौती के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने से मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा है, लेकिन मैंने काफी यात्रा भी की है जिससे मेरे अभ्यास में थोड़ी बाधा आई है। लेकिन मैं लय में वापसी करने की कोशिश कर रही हूं।’’

भाषा

पंत

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