एशियाड में बैडमिंटन: भारतीय पुरुष टीम ने पदक पक्का किया, महिला टीम बाहर
एशियाड में बैडमिंटन: भारतीय पुरुष टीम ने पदक पक्का किया, महिला टीम बाहर
नागोया, 22 सितंबर (भाषा) भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम ने मंगलवार को यहां क्वार्टरफाइनल में जापान को 3-0 से हराकर पदक पक्का कर दिया जबकि महिला टीम को मेजबान टीम से 1-3 से हारकर एशियाई खेलों से बाहर हो गई।
भारतीय पुरुष टीम ने पिछले चरण में रजत पदक जीता था। उसके लिए लक्ष्य सेन ने वापसी करते हुए शानदार जीत हासिल की, उनके अलावा सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी, चिराग शेट्टी और आयुष शेट्टी की जीत ने टीम को सफलता दिलाई। अब बुधवार को सेमीफाइनल में भारत का सामना मौजूदा चैंपियन चीन और कोरिया के बीच होने वाले दूसरे क्वार्टर फाइनल के विजेता से होगा।
एशियाड से पहले लगातार कुछ टूर्नामेंट में शुरूआती दौर से बाहर होने के कारण सेन का मनोबल थोड़ा गिरा हुआ था, उन्होंने पहला गेम गंवाकर शुरुआत की और निर्णायक गेम में 14-19 से पिछड़ने के बाद हार की कगार पर थे।
लेकिन अल्मोड़ा के 25 वर्षीय खिलाड़ी ने अपनी काबिलियत के बूते लगातार सात अंक हासिल कर दुनिया के सातवें नंबर और दो बार के विश्व चैंपियनशिप रजत पदक विजेता कोडाई नाराओका को 11-21, 21-5, 21-19 से हराकर भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई।
इस सत्र में दो खिताब जीतने वाली सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी ने पूर्व विश्व चैंपियन होकी ताकुरो और कोबायाशी युगो की जोड़ी को 21-18, 24-22 से हराकर भारत की बढ़त 2-0 कर दी।
इसके बाद इस साल बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाले आयुष शेट्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दुनिया के 16वें नंबर के कोकी वातानाबे को 21-10, 21-19 से हराने के साथ मुकाबला और भारत का पदक पक्का कर दिया।
भारत के पूर्व कोच विमल कुमार ने कहा, ‘‘हमारी पुरुष टीम की जापान पर जीत बहुत शानदार रही। इससे 1986 के एशियाई खेलों की कुछ बहुत खास यादें ताज़ा हो गई हैं। ’’
कुमार 1986 एशियाड में भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम का हिस्सा थे जिसमें उनके साथ प्रकाश पादुकोण, सैयद मोदी, उदय पवार, रवि कुंटे, लेरॉय डीसा और सनत मिश्रा भी शामिल थे।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे अभियान के सबसे यादगार पलों में से एक जापान पर हमारी जीत थी। प्रकाश और मैंने अपने-अपने एकल मैच जीते, और प्रकाश ने उदय पवार के साथ मिलकर पुरुष युगल जीता। यह हम सभी के लिए गर्व का पल था और भारतीय बैडमिंटन के लिए एक यादगार जीत थी। ’’
इस जीत ने दिन में पहले महिला टीम की हार से छाई निराशा को कुछ हद तक कम कर दिया।
विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली त्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी ने शानदार खेल दिखाया लेकिन एकल खिलाड़ियों के निराशाजनक प्रदर्शन के कारण भारतीय महिला टीम क्वार्टर फाइनल में जापान से 1-3 से हारकर बाहर हो गई।
दुनिया के 14वें नंबर के खिलाड़ी सेन की तैयारी इतनी अच्छी नहीं रही। घरेलू सरजमीं पर हुई विश्व चैंपियनशिप में वह अमेरिका के गैरेट टैन से हारकर शुरुआती दौर में ही बाहर हो गए थे। बाद में उनके ‘मेंटोर’ विमल कुमार ने बताया था कि लक्ष्य पीठ की चोट से जूझ रहे थे।
ऐसे प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ मुकाबला काफी दबाव वाला था जिसने पिछली पांच भिड़ंत में से चार में सेन को हराया था। सेन ने शुरुआत में संघर्ष किया जिससे वह पहला गेम गंवा बैठे।
हालांकि मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद की प्रेरणादायक बातचीत और कोर्ट बदलने के बाद भारतीय खिलाड़ी ने जोरदार वापसी की। उन्होंने दूसरे गेम में प्रतिद्वंद्वी के बैकहैंड को निशाना बनाकर लगातार स्मैश लगाए और 11-2 की बढ़त हासिल कर ली।
फिर उन्होंने लय बरकरार रखते हुए स्कोर 16-3 कर दिया। उन्होंने शॉट्स में अच्छी विविधता दिखाई जबकि नाराओका को शटल को कोर्ट के अंदर रखने में परेशानी हुई। जापानी खिलाड़ी का एक और शॉट बाहर चले जाने के बाद सेन ने गेम अपने नाम कर लिया।
निर्णायक गेम में सेन ने शुरुआत में मुकाबले को करीबी बनाए रखा, लेकिन अंतिम छोर बदलने से पहले ब्रेक तक नाराओका ने 11-6 की बढ़त बना ली।
सेन के लगातार संघर्ष के बाद जापानी खिलाड़ी 16-10 तक पहुंच गया। भारतीय खिलाड़ी रैलियों में अपने प्रतिद्वंद्वी को उलझाए रखते हुए सही मौके का इंतजार कर रहे थे।
हालांकि सेन की दो ‘अनफोर्स्ड’ गलतियों का फायदा उठाकर नाराओका ने 19-14 की बढ़त बना ली।
इसके बाद भारतीय खिलाड़ी ने जबरदस्त वापसी करते हुए लगातार चार अंक हासिल किए। नाराओका दबाव में बिखरने लगे और उन्होंने कई गलतियां कीं।
सेन ने फिर बैक लाइन पर दो सटीक रिटर्न लगाकर मैच प्वाइंट हासिल किया और नाराओका के अगला शॉट नेट में मारते ही मुकाबला अपने नाम कर लिया।
महिला वर्ग में भारत की तरफ से दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू ने मुकाबले की शुरुआत की। उन्होंने विश्व में तीसरे नंबर की खिलाड़ी अकाने यामागुची के सामने कड़ी चुनौती पेश की लेकिन निर्णायक गेम में उनका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा और वह आखिर में 23-21, 18-21, 6-21 से हार गईं।
उन्नति हुड्डा इसके बाद 2022 की विश्व जूनियर चैंपियन और विश्व में सातवें नंबर की खिलाड़ी टोमोका मियाजाकी से 16-21, 18-21 से हार गईं, जिससे जापान 2-0 से आगे हो गया।
नयी दिल्ली में हाल ही में विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली त्रीसा और गायत्री ने पहले युगल मैच में युकी फुकुशिमा और मायु मात्सुमोतो को 21-17, 21-16 से हराकर भारत को मुकाबले में बनाए रखा।
लेकिन युवा शटलर तन्वी शर्मा तीसरे एकल मुकाबले में पूर्व विश्व चैंपियन नोजोमी ओकुहारा से 12-21, 10-21 से हार गईं और इस तरह से जापान ने 3-1 से जीत हासिल कर ली।
सिंधू ने यामागुची के खिलाफ पहले गेम में 13-17 से वापसी करते हुए 23-21 से जीत हासिल की। इसके बाद वह अच्छी स्थिति में दिख रही थीं।
दूसरे गेम में ब्रेक तक यामागुची दो अंकों की बढ़त बनाए हुए थीं। सिंधू ने 12-17 से पिछड़ने के बाद वापसी की कोशिश की, लेकिन जापानी खिलाड़ी ने संयम बनाए रखते हुए दूसरा गेम 21-18 से जीत लिया।
निर्णायक गेम में सिंधू किसी भी समय लय में नहीं दिखी और जल्द ही 6-14 से पीछे हो गईं। यामागुची ने 10 मैच प्वाइंट हासिल किए और एक सटीक रिटर्न शॉट से मैच जीत लिया।
भाषा नमिता पंत
पंत

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