बीएआई और साइ ने बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप से पहले इंदिरा गांधी स्टेडियम का किया व्यापक कायाकल्प

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बीएआई और साइ ने बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप से पहले इंदिरा गांधी स्टेडियम का किया व्यापक कायाकल्प

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  • Publish Date - August 10, 2026 / 06:45 PM IST,
    Updated On - August 10, 2026 / 06:45 PM IST

नयी दिल्ली, 10 अगस्त (भाषा) भारत में आयोजित होने वाली आगामी बीडब्ल्यूएफ विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप से पहले आयोजकों ने इंदिरा गांधी स्टेडियम को आधुनिक बनाने और उसकी सुविधाओं में व्यापक सुधार करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

इसका उद्देश्य इस साल की शुरुआत में इंडिया ओपन के दौरान सामने आई अव्यवस्थाओं जैसी स्थिति से बचना है।

भारतीय बैडमिंटन संघ (बीएआई) और भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) ने जनवरी में हुए इंडिया ओपन से सबक लिया। उस टूर्नामेंट के दौरान कबूतरों की वजह से एचएस प्रणय और लोह कीन यू के बीच दूसरे दौर का मुकाबला दो बार रोकना पड़ा था। इसके अलावा स्वच्छता और दिल्ली के प्रदूषण को लेकर उठी शिकायतों ने भी बीएआई को असहज स्थिति में डाल दिया था।

बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप की 17 वर्षों बाद भारत में वापसी हो रही है। ऐसे में आयोजक 17 से 23 अगस्त तक होने वाले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के दौरान किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। कबूतरों और अन्य पक्षियों को दूर रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं और बंदरों से निपटने के लिए भी विशेषज्ञों की मदद ली गई है।

स्टेडियम के ‘वेंट’ को पूरी तरह सील कर दिया गया है। पुराने लकड़ी के दरवाजों की जगह ‘डबल-डोर एंट्री सिस्टम’ लगाया गया है जिसमें बाहर की ओर एक ‘ऑटोमैटिक’ दरवाजा भी जोड़ा गया है। इसके अलावा अमेरिका से मंगाया गया एक विशेष गैर-विषैला (नॉन-टॉक्सिक) जैल स्टेडियम की ‘डक्टिंग’ के आसपास लगाया गया है जो पक्षियों और कीड़ों को दूर रखता है। अंतिम सुरक्षा परत के रूप में ऐसे ‘पोर्टेबल’ उपकरण लगाए गए हैं जो शिकारी पक्षियों जैसी आवाज निकालते हैं ताकि कबूतर स्टेडियम के आसपास नहीं आएं।

साइ के कार्यकारी निदेशक अंबर प्रताप सिंह ने पत्रकारों से कहा, ‘‘जनवरी में इंडिया ओपन के दौरान हमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। तभी हमने तय किया कि स्टेडियम की स्थिति में व्यापक सुधार किया जाएगा। हमने फरवरी से ही इसकी योजना बनानी शुरू कर दी थी। यह काफी पुराना स्टेडियम है और इसकी आधारभूत संरचना भी पुरानी हो चुकी थी। इसलिए हमारा लक्ष्य इसे नया स्वरूप देना और इसे विश्वस्तरीय आयोजन के अनुरूप तैयार करना था। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल संरचनात्मक सुधार नहीं है, बल्कि कई सौंदर्यात्मक सुधार भी किए गए हैं। उदाहरण के लिए स्टेडियम के सामने स्थित झील को विकसित किया गया है। प्रतियोगिता शुरू होने तक यह झील बेहद आकर्षक दिखाई देगी। इसके अलावा छत की मरम्मत, ‘एक्सपेंशन जॉइंट’ की मरम्मत, नयी कुर्सियों की स्थापना, पुरानी कुर्सियों की पॉलिश और पूरे परिसर की रंगाई-पुताई की गई है। ’’

कबूतरों की समस्या पर उन्होंने कहा, ‘‘एरिना के अंदर कबूतरों को रोकने के लिए हमने नयी तकनीकों का इस्तेमाल किया है। अमेरिका से विशेष मशीनें मंगाई गई हैं और गैर-विषैले जैल का उपयोग किया गया है जो कबूतरों को दूर रखता है। ’’

उन्होंने बताया कि यह पूरा कार्य साइ, सीपीडब्ल्यूडी (केंद्रीय लोक निर्माण विभाग) और बीएआई के संयुक्त प्रयासों से किया गया है। उन्होंने कहा कि विश्व बैडमिंटन महासंघ (बीडब्ल्यूएफ) भी स्टेडियम की वर्तमान स्थिति और किए गए कार्यों से पूरी तरह संतुष्ट है।

अंबर प्रताप सिंह ने कहा, ‘‘साइ ने हाल में अपना एक विशेष इंजीनियरिंग विभाग बनाया है। कुछ कार्य इस विभाग ने किए, कुछ सीपीडब्ल्यूडी ने और अब स्टेडियम बीएआई को सौंप दिया गया है जो इसे टूर्नामेंट के लिए अंतिम रूप से तैयार कर रहा है। बीडब्ल्यूएफ हमारे काम से काफी संतुष्ट है। ’’

उन्होंने यह भी बताया कि स्टेडियम परिसर में आवारा कुत्तों और बंदरों की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘डबल-डोर और ‘ऑटोमैटिक क्लोजिंग सिस्टम’ लगाने के बाद अब बंदरों के लिए एरिना के अंदर प्रवेश करना लगभग असंभव है। पूरे परिसर में बंदरों के आने की संभावना बनी रह सकती है, लेकिन इसके लिए हम एमसीडी के लगातार संपर्क में हैं। आवारा कुत्तों के मामले में भी एमसीडी आवश्यक कार्रवाई करेगी और उन्हें ‘शेल्टर होम’ भेजा जाएगा। ’’

हालांकि उन्होंने स्टेडियम के नवीनीकरण पर हुए कुल खर्च का खुलासा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि कोर्ट की लाइट की व्यवस्था और ‘ड्रिफ्ट कंट्रोल’ को लेकर बीडब्ल्यूएफ पूरी तरह संतुष्ट है।

उन्होंने बताया, ‘‘कोर्ट की लाइट की व्यवस्था और ‘ड्रिफ्ट कंट्रोल’ का परीक्षण बीडब्ल्यूएफ के विशेषज्ञों ने किया है। यह तकनीकी विषय है और उनकी संतुष्टि हमारे लिए महत्वपूर्ण है। इंडिया ओपन के दौरान कोर्ट पर हल्की छाया की समस्या थी जिसे अब पूरी तरह दूर कर दिया गया है। इंडोनेशिया से एक विशेषज्ञ अंतिम परीक्षण के लिए आएंगे, लेकिन बीडब्ल्यूएफ पहले ही सुविधाओं से संतुष्ट है। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा छत से पानी टपकने की समस्या भी पूरी तरह दूर कर दी गई है। यह बहुत पुरानी इमारत है और बारिश के दौरान रिसाव एक बड़ी चुनौती थी। पिछले कुछ दिनों में हुई भारी बारिश ने हमारी तैयारियों की परीक्षा ली और इंजीनियरिंग टीम ने बेहतरीन काम किया है। ’’

भाषा नमिता आनन्द

आनन्द