नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) भारत के उभरते हुए भाला फेंक खिलाड़ी रोहित यादव 19 सितंबर से शुरू होने वाले एशियाई खेलों में महान एथलीट नीरज चोपड़ा के नक्शेकदम पर चलना चाहते हैं।
नीरज चोट के कारण आगामी एशियाई खेलों से हट चुके हैं।
उत्तर प्रदेश के डभिया गांव के रहने वाले 25 वर्षीय रोहित का इस साल ग्लास्गो में राष्ट्रमंडल खेलों में प्रदर्शन निराशाजनक रहा था जहां उन्होंने केवल 81.56 मीटर का थ्रो किया था। हालांकि 22 अगस्त को भुवनेश्वर में आयोजित विश्व एथलेटिक्स महाद्वीपीय टूर सिल्वर मीट में उन्होंने 87.68 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।
रोहित को भरोसा है कि वह आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों में अपने इस प्रदर्शन को और बेहतर कर सकते हैं।
उन्होंने पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘‘मैं कोई दबाव नहीं ले रहा हूं, हालांकि मुझे पता है कि लोगों को मुझसे काफी उम्मीदें हैं। नीरज का यहां नहीं होना अच्छी बात नहीं है, लेकिन हमें इसे स्वीकार करना होगा। नीरज का पदक शत प्रतिशत पक्का माना जा रहा था, लेकिन मैं उनकी जगह भरने की कोशिश करूंगा। मुझे पता है कि मैं उनकी जगह नहीं ले सकता, लेकिन मैं पोडियम पर पहुंचने की कोशिश करूंगा। मैं अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो करने की कोशिश करूंगा ताकि पदक जीतने वालों में शामिल हो सकूं। ’’
रोहित ने कहा, ‘‘नीरज का स्थान अलग है। उन्होंने देश के लिए इतिहास बनाया है। दुनिया में उन्होंने हर तरह के पदक जीते हैं। दुनिया में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां उन्होंने पदक नहीं जीता हो। मैं भी उनकी उपलब्धियों जैसा प्रदर्शन करने की कोशिश करूंगा, ताकि देश को मुझ पर गर्व हो। ’’
रोहित ने कहा कि अपने प्रदर्शन में सुधार करने के लिए उन्हें डायमंड लीग जैसी शीर्ष स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे डायमंड लीग जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं में खेलना है। अगर मैं ऐसा कर पाया तो इससे मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ेगा। मेरे पास वह क्षमता है और मैं दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के बीच उस स्तर पर ऐसा थ्रो करना चाहता हूं। यह मेरे लिए बिल्कुल अलग अनुभव होगा। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मेरा लक्ष्य अगले साल सभी बड़ी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना है, ताकि नीरज के स्तर तक पहुंच सकूं और भारत को गौरवान्वित कर सकूं। ’’
रोहित ने बताया कि राष्ट्रमंडल खेलों के बाद उन्होंने अपनी तकनीक में कोई खास बदलाव नहीं किया, बल्कि अपनी लय और मानसिकता पर काम किया।
उन्होंने कहा, ‘‘यह बदलाव करने की बात नहीं है, बल्कि पूरी तरह मानसिकता की बात है। राष्ट्रमंडल खेलों में मेरा ‘रन-अप’ सही नहीं था और मैं समझ नहीं पाया कि ऐसा क्यों हुआ। मेरी लय पूरी तरह बिगड़ गई थी और मैं अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो नहीं कर सका। इसके बाद हमने सिर्फ लय और केवल थ्रो पर ध्यान केंद्रित करने पर पर काम किया। मुझे यह याद रखना है कि रोहित को सिर्फ रोहित बनना है। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘किसी ने मुझसे कहा कि दूसरों को मत देखो, सिर्फ अपने थ्रो पर ध्यान दो और फिर तुम पोडियम पर जगह बना सकते हो। ’’
रोहित किसी खास दूरी को लक्ष्य नहीं बना रहे हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य एशियाई खेलों में पोडियम पर पहुंचकर पदक जीतना है।
श्रीलंका के भाला फेंक एथलीट रूमेश पथिरागे (2026 डायमंड लीग और 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक) और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता पाकिस्तान के अरशद नदीम से मिलने वाली चुनौती के बारे में पूछे जाने पर रोहित ने कहा, ‘‘वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे और मैं भी अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो करने की कोशिश करूंगा। बाकी फिर देखा जाएगा। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब मैंने 87.68 मीटर का थ्रो किया था, तब मैंने अपना शत प्रतिशत प्रयास नहीं किया था। इसलिए भाला दो-तीन मीटर आगे-पीछे जा सकता है, यह संभव है। उन्होंने अपना नाम बनाया है, यह अच्छी बात है। हर किसी को अपना नाम बनाना होता है और हर किसी का समय आता है। ’’
भाषा नमिता सुधीर
सुधीर