राजनाथ सिंह ने श्रीलंका के राष्ट्रपति से की मुलाकात, क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर जताई प्रतिबद्धता

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राजनाथ सिंह ने श्रीलंका के राष्ट्रपति से की मुलाकात, क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर जताई प्रतिबद्धता

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  • Publish Date - September 9, 2026 / 09:26 PM IST,
    Updated On - September 9, 2026 / 09:26 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

कोलंबो, नौ सितंबर (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रक्षा, आर्थिक, समुद्री तथा क्षेत्रीय साझेदारी को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।

सिंह मंगलवार को तीन दिवसीय यात्रा पर श्रीलंका पहुंचे। वह 38 वर्षों में द्वीपीय राष्ट्र की यात्रा करने वाले पहले भारतीय रक्षा मंत्री हैं।

भारतीय रक्षा मंत्रालय ने कहा, “दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच बहुआयामी साझेदारी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सार्थक चर्चा की। दोनों देशों के संबंध पारंपरिक रूप से मधुर और आपसी विश्वास पर आधारित रहे हैं।”

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शुभकामनाएं दीं और कहा कि दोनों देशों के नागरिकों के बीच मजबूत ऐतिहासिक व सभ्यतागत संबंधों पर आधारित गहरी मित्रता है।

सिंह ने श्रीलंकाई राष्ट्रपति को उनकी सरकार के दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर भी बधाई दी।

रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘दोनों पक्षों ने इस बात की पुष्टि की कि सभ्यतागत रूप से समान, करीबी पड़ोसी और समुद्री साझेदार होने के नाते भारत और श्रीलंका अपने देशों के विकास और अपने लोगों के कल्याण के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे। साथ ही, हम अपने क्षेत्र की सुरक्षा, संरक्षा, शांति और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए भी संयुक्त रूप से काम करते रहेंगे।’’

सिंह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज कोलंबो में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके के साथ गर्मजोशी भरी और बेहद सार्थक बैठक हुई।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनकी सरकार के सफलतापूर्वक दो वर्ष पूरे होने पर बधाई दी।’’

बयान के अनुसार, दिसानायके ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई अपनी मुलाकातों को याद किया और दोहराया कि श्रीलंका, भारत के सुरक्षा हितों के प्रतिकूल किसी भी गतिविधि के लिए अपने क्षेत्र का इस्तेमाल कभी नहीं होने देगा।

श्रीलंका के राष्ट्रपति ने चक्रवात दितवाह के दौरान ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ के तहत भारत द्वारा दी गई राहत सहायता और पुनर्निर्माण एवं पुनर्वास कार्यों को सुगम बनाने के लिए नयी दिल्ली द्वारा दिए गए व्यापक पुनर्वास पैकेज के लिए भी आभार व्यक्त किया।

बयान के अनुसार, सिंह ने कहा कि श्रीलंका के सबसे करीबी मित्र और पड़ोसी के रूप में भारत सहायता को कोई एहसान नहीं, बल्कि संकट के समय सबसे पहले मदद के लिए आगे आने वाले देश के रूप में अपनी जिम्मेदारी मानता है और भविष्य में भी ऐसा करता रहेगा।

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं ने भारतीय रक्षा बलों द्वारा निर्मित तीन बेली पुलों का वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए उद्घाटन किया।

दोनों पक्षों ने श्रीलंकाई वायुसेना के लिए एल-70 तोपों के उन्नयन तथा भारत और श्रीलंका के राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) और राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालयों (एनडीसी) के बीच सहयोग से संबंधित समझौता ज्ञापनों का भी आदान-प्रदान किया।

श्रीलंकाई वायुसेना की छह एल-70 तोपों के उन्नयन से संबंधित समझौता ज्ञापन भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान के तहत है।

बयान में कहा गया कि इन वायु रक्षा तोपों के उन्नयन से श्रीलंका में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की वायु रक्षा व्यवस्था काफी मजबूत होगी। इन वायु रक्षा तोपों की आपूर्ति भारत ने पहले श्रीलंकाई वायुसेना को की थी।

बयान के अनुसार, भारत के राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय और श्रीलंका के राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के बीच शैक्षणिक सहयोग से संबंधित समझौता ज्ञापन ज्ञान के आदान-प्रदान को सुगम बनाएगा। यह दोनों ‘सहयोगी संस्थानों’ के बीच शैक्षणिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

इसमें कहा गया है, ‘‘एनसीसी सहयोग से संबंधित समझौता ज्ञापन भारत और श्रीलंका के बीच एनसीसी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम को औपचारिक रूप देगा। यह आदान-प्रदान कार्यक्रम दुनिया के विभिन्न देशों के एनसीसी कैडेटों को हर साल नयी दिल्ली आने और एनसीसी के कार्यक्रमों में भाग लेने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।’’

सिंह ने मंगलवार को कहा था कि संकट के समय भारत हमेशा श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के संबंध साझा इतिहास, संस्कृति और आस्था पर आधारित हैं।

उन्होंने भारतीय प्रवासियों के साथ बातचीत के दौरान यह बात कही थी।

सिंह ने कहा था, ‘‘जब भी इस द्वीपीय देश के सामने कोई संकट आएगा, भारत हमेशा श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।’’

सिंह रक्षा और विदेश मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।

दिन के दौरान बाद में सिंह ने प्रधानमंत्री हरिनी अमरसूर्या से मुलाकात की और विकास सहयोग, शिक्षा तथा भारत-श्रीलंका के बीच करीबी सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंधों से जुड़े कई मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैंने इस बात को रेखांकित किया कि साझा विरासत वाली लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के रूप में भारत और श्रीलंका को क्षेत्र की शांति और समृद्धि के लिए विकास संबंधी साझा दृष्टिकोण पर मिलकर काम करते रहना चाहिए।’’

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सिंह ने सहयोग के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक के रूप में क्षमता निर्माण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के माध्यम से वह ऐतिहासिक और बहुआयामी भारत-श्रीलंका साझेदारी को और गति देने की उम्मीद करते हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कोलंबो स्थित भारतीय शांति सेना (आईपीकेएफ) स्मारक का दौरा किया और कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

आईपीकेएफ भारत की ओर से जुलाई 1987 में श्रीलंका भेजी गई सैन्य टुकड़ी थी। इसे अलगाववादी उग्रवादी संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) का निशस्त्रीकरण करने और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों के तहत भेजा गया था।

भाषा

संतोष पवनेश

पवनेश