चानू की निगाहें एशियाई खेलों में बहुप्रतीक्षित पदक पर
चानू की निगाहें एशियाई खेलों में बहुप्रतीक्षित पदक पर
नागोया, 22 सितंबर (भाषा) भारतीय भारोत्तोलक मीराबाई चानू के नाम पर एक ओलंपिक रजत पदक, एक विश्व खिताब और राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक दर्ज हैं, लेकिन वह अभी तक एशियाई खेलों में पदक नहीं जीत पाई है। यह स्टार खिलाड़ी बुधवार को यहां होने वाली भारोत्तोलन प्रतियोगिता में इस इंतजार को खत्म करने की कोशिश करेगी।
चानू महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी। इस भार वर्ग में चीन के भारोत्तोलक भाग नहीं ले रहे हैं जिससे मीराबाई के पास पदक जीतने का यह शानदार मौका है।
लेकिन उनकी राह में उत्तर कोरिया की मौजूदा विश्व और एशियाई खेलों की चैंपियन री सोंग गम खड़ी हैं। वह चानू की स्वर्ण पदक की उम्मीदों के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं।
मीराबाई ने अभी तक एशियाई खेलों में दो बार भाग लिया है लेकिन दोनों अवसरों पर वह पोडियम तक नहीं पहुंच पाई थी। मणिपुर की रहने वाली यह खिलाड़ी 2014 में नौवें स्थान पर रही थी। पीठ की चोट के कारण वह 2018 के एशियाई खेलों में भाग नहीं ले पाई थी जबकि 2023 में चौथे स्थान पर रही।
यह 32 वर्षीय खिलाड़ी तब से मुख्य कोच विजय शर्मा के साथ विशेष रूप से एशियाई खेलों की तैयारी में लगी हुई है।
ग्लास्गो में हाल ही में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद भी मीराबाई अगले ही दिन से अभ्यास में लग गई थी।
मीराबाई ने पीटीआई से कहा, ‘‘मेरा पूरा ध्यान एशियाई खेलों में पदक जीतने पर केंद्रित है। यही एकमात्र पदक है जो मेरे पास नहीं है।’’
मीराबाई की तैयारियों में प्रतियोगिता में अपनी सीमाओं को आगे बढ़ाने की योजना भी शामिल है। वह स्नैच में 90 किलोग्राम उठाने का लक्ष्य लेकर चल रही हैं। यह ऐसा वजन है जिसे वह पिछले छह वर्षों से हासिल करने की कोशिश कर रही हैं।
उन्होंने कहा था, ‘‘आप वास्तव में यह अनुमान नहीं लगा सकते कि शरीर किसी खास दिन कैसा साथ देगा, लेकिन मैं एशियाई खेलों में 90 किलोग्राम भार उठाने की पूरी कोशिश करूंगी।’’
मीराबाई के लिए हालांकि काम आसान नहीं होगा। री सोंग गम पहले ही इस वर्ग में सर्वश्रेष्ठ भारोत्तोलक के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं, जबकि भारतीय खिलाड़ी को शारीरिक चुनौतियों का सामना करना होगा। मीराबाई के यह अंतिम एशियाई खेल भी हो सकते हैं। ।
दक्षिण कोरिया की जैग्योंग शिन, चीनी ताइपे की फांग वान-लिंग और थाईलैंड की सुथासिनी काओसिंगखोन जैसी खिलाड़ी भी इस वजन वर्ग में पदक की दावेदार हैं।
भाषा
पंत सुधीर
सुधीर

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