नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) की शीर्ष परिषद ने रविवार को फैसला किया कि उसकी समिति के किसी भी सदस्य को मानार्थ पास नहीं मिलेंगे। यह फैसला हाल ही में इन टिकटों की कालाबाजारी को लेकर हुए विवाद के बाद लिया गया है।
दिल्ली पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और डीडीसीए के अधिक वेतन पाने वाले एक विवादित कर्मचारी को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। हालांकि संघ ने अभी तक उस व्यक्ति या उसके सहायक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।
डीडीसीए के निदेशक और जाने-माने वकील श्याम शर्मा ने परिषद की बैठक के बाद जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया, ‘‘अध्यक्ष रोहन जेटली ने प्रस्ताव रखा था कि शीर्ष परिषद का कोई भी सदस्य नियम के तौर पर मानार्थ पास स्वीकार नहीं करेगा। इस प्रस्ताव को अधिकतर सदस्यों ने मान लिया।’’
हालांकि सालाना फीस देने वाले डीडीसीए के आम सदस्यों को गेट नंबर 17-18 के लिए दो मानार्थ टिकट और साथ ही बुफे लंच भी मिलेगा।
पिछले कुछ वर्षों में डीडीसीए सीनियर, अंडर-23 या अंडर-19 टीम के लिए 25 खिलाड़ी भेजने को लेकर बदनाम रहा है। आरोप है कि इसके कई असरदार सदस्य अपनी पसंद के खिलाड़ियों को टीम में शामिल करवाने के लिए दबाव डालते हैं जो असल में राज्य की टीम में जगह पाने के हकदार नहीं होते।
हालांकि भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) सिर्फ 15 खिलाड़ियों की मैच फीस देता है लेकिन संघ के खर्च पर इतनी बड़ी टीम भेजने के फैसले पर कई लोगों ने सवाल उठाए हैं। कई सदस्यों ने कुछ खास खिलाड़ियों के चयन पर भी सवाल खड़े किए हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘यह सर्वसम्मति से तय किया गया कि सभी टीम के लिए, चाहे वे किसी भी आयु वर्ग की या प्रारूप की हों, टीम का आकार सिर्फ 16 खिलाड़ियों तक ही सीमित रहेगा।’’
विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘क्रिकेट सलाहकार समिति का गठन और चयनकर्ताओं व कोच का चुनाव प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा जिससे कि खिलाड़ियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।’’
साथ ही घरेलू क्रिकेट के प्रशंसकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अंपायरों और स्कोरर की मैच फीस में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी।
भाषा सुधीर नमिता
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