नई दिल्ली/भोपालः Mahadev Satta App Case: देश के सबसे बड़े ऑनलाइन अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क माने जाने वाले महादेव सट्टा ऐप मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अदालत में कुल 11 नई चार्जशीट दाखिल की हैं। इनमें छह चार्जशीट भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत छह आरोपियों के खिलाफ, जबकि पांच चार्जशीट आईपीसी और छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत 66 आरोपियों के खिलाफ पेश की गई हैं।
Mahadev Satta App Case: पहली छह चार्जशीट में असीम दास, रोहित गुलाटी, विकास छपरिया, अनिल धम्मानी, भोपाल निवासी विशाल आहूजा और धीरज आहूजा को नामजद किया गया है। जांच एजेंसी ने मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल और भोपाल के ट्रेवल्स एजेंसी संचालक भाई विशाल आहूजा और धीरज अहूजा के खिलाफ पहले से दाखिल आरोप पत्रों में अतिरिक्त साक्ष्य भी कोर्ट में पेश किए हैं। इन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। वहीं, दूसरी पांच चार्जशीट में 66 आरोपियों को शामिल किया गया है। इनमें सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और सट्टेबाजी सिंडिकेट के कई पैनल सदस्य भी शामिल हैं। इन पर अवैध सट्टेबाजी के संचालन, अपराध की आय को छिपाने और धन शोधन से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।
सीबीआई के अनुसार, महादेव ऐप के मुख्य संचालक सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल विदेश में बैठकर पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। सोशल मीडिया के माध्यम से देशभर के लाखों लोगों को इस अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क से जोड़ा गया। जांच में सामने आया है कि सट्टेबाजी से अर्जित अवैध धन को फर्जी ‘म्यूल अकाउंट्स’ के जरिए विदेश भेजा जाता था। एजेंसी का दावा है कि इस रकम का एक हिस्सा कथित तौर पर संरक्षण राशि (प्रोटेक्शन मनी) के रूप में कुछ अधिकारियों तक भी पहुंचाया जाता था।
बता दें कि महादेव ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल और उनके कई प्रमुख सहयोगी कुछ साल पहले ही भारत से फरार होकर पश्चिम एशियाई देशों में शरण ले चुके हैं, और वे वहीं से बैठकर भारत के बाहर से इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं। इन भगोड़ों को कानून के दायरे में लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद ली जा रही है। विदेश भाग चुके चार मुख्य आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस (अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट) पहले ही जारी किए जा चुके हैं। इसके साथ ही, भारतीय कानून के तहत इन व्यक्तियों को ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जिससे देश में मौजूद उनकी संपत्तियों को जब्त किया जा सके। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह जांच अभी समाप्त नहीं हुई है। सीबीआई इस सिंडिकेट के पूरे देशव्यापी फैलाव को बेनकाब करने, इसके पीछे छिपे राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण का पर्दाफाश करने और इसमें शामिल हर एक दोषी को कानून के कटघरे में लाने के लिए कड़ाई से जुटी हुई है। एजेंसी ने पुष्टि की है कि जैसे-जैसे जांच के नए सिरे सामने आएंगे, आने वाले समय में और भी पूरक आरोप पत्र दाखिल किए जाएंगे।