Gyan Bharatam Campaign MP Manuscript Discovery / Image Source : FILE
भोपाल : Gyan Bharatam Campaign MP Manuscript Discovery मध्यप्रदेश में चल रहा ज्ञान भारतम् अभियान भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। इस अभियान के तहत पन्ना जिले से एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर सामने आई है, जिसने इतिहासकारों और शोधकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पन्ना के श्री राम-जानकी मंदिर में महाकवि आचार्य केशवदास द्वारा वर्ष 1591 ईस्वी में रचित प्रसिद्ध ग्रंथ ‘रसिकप्रिया’ की दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि मिली है। माना जा रहा है कि यह खोज हिंदी साहित्य और भारतीय सांस्कृतिक इतिहास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
‘रसिकप्रिया’ को हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर माना जाता है। इसमें श्रृंगार रस, नायिका-भेद और काव्य सौंदर्य का अद्भुत वर्णन मिलता है। चार सौ वर्ष से अधिक पुरानी इस हस्तलिखित पांडुलिपि का सुरक्षित मिलना इस बात का प्रमाण है कि पन्ना की धरती आज भी इतिहास के अनमोल खजाने अपने भीतर समेटे हुए है।
Gyan Bharatam Campaign MP Manuscript Discovery 2026 ज्ञान भारतम् अभियान के दौरान पन्ना जिले के घरों, मंदिरों और निजी संग्रहों में व्यापक खोज अभियान चलाया गया। इस दौरान जिले के 64 स्थानों से 300 से 400 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां और ऐतिहासिक दस्तावेज सामने आए हैं। इनमें लगभग 220 वर्ष पुरानी श्रीमद्भागवत महापुराण की हस्तलिखित पांडुलिपि, प्राचीन विश्व मानचित्र तथा कई दुर्लभ धार्मिक और ऐतिहासिक ग्रंथ शामिल हैं।
इतना ही नहीं, जिले के एक शास्त्री परिवार के संग्रह से वर्ष 1915 का बाजीराव पेशवा से जुड़ा हस्तलिखित पत्र भी मिला है, जो उस दौर के सामाजिक और प्रशासनिक इतिहास की महत्वपूर्ण जानकारी देने वाला दस्तावेज माना जा रहा है।अभियान में जैन समुदाय, प्रणामी संप्रदाय, हिंदू धार्मिक ग्रंथों तथा तत्कालीन राजाओं और रियासतों से जुड़ी अनेक हस्तलिखित पांडुलिपियां भी सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी धरोहरों का डिजिटलीकरण और वैज्ञानिक संरक्षण किया गया तो भारतीय इतिहास, साहित्य, संस्कृति और प्राचीन ज्ञान पर नए शोध के द्वार खुलेंगे।
Rasikpriya Manuscript 1591 Acharya Keshavdas ज्ञान भारतम् अभियान केवल पुरानी पांडुलिपियों की खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने का एक बड़ा राष्ट्रीय प्रयास बन चुका है। पन्ना में मिली 1591 की ‘रसिकप्रिया’ की हस्तलिखित प्रति इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जा रही है। यह खोज आने वाली पीढ़ियों को अपनी समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का एक मजबूत माध्यम बनेगी और इतिहास के अनमोल खजाने को सुरक्षित रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। अब इन पांडुलिपियों को डिसलाइजेशन करने की तैयारी चल रही है पन्ना कलेक्टर ने एक समिति बनाई है जिसमें 5 सदस्य बनाए गए हैं यह 5 सदस्य इन पांडुलिपियों को इकट्ठा करके इनका डिजिटाइजेशन किया जाएगा जिससे पन्ना की धरोहर देश-विदेश में सुनहरी अक्षरों में लिखी जाए