मां को नहीं बताया कि एशियाई खेलों के लिए जा रही हूं: सीमा

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मां को नहीं बताया कि एशियाई खेलों के लिए जा रही हूं: सीमा

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  • Publish Date - September 25, 2026 / 03:34 PM IST,
    Updated On - September 25, 2026 / 03:34 PM IST

(फिलेम दीपक सिंह)

नागोया, 25 सितंबर (भाषा) इतिहास रचने वाली लंबी दूरी की धाविका सीमा नहीं चाहती थीं कि जब वह एशियाई खेलों के लिए जापान जाएं तो उनकी उम्रदराज मां उनकी चिंता करें कि वह कहां हैं, इसलिए उन्होंने एक सरल समाधान निकाला और वह उन्हें बिना बताए ही नागोया पहुंच गईं।

सीमा ने अपने करियर के सबसे बड़े टूर्नामेंट के बारे में अपनी मां को नहीं बताया लेकिन महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में 32:50.05 सेकेंड के समय से अप्रत्याशित कांस्य पदक जीतने वाली इस एथलीट का कहना है कि उनकी मां बहुत चिंता करती हैं और जब भी वह यात्रा करती हैं तो बहुत चिंतित हो जाती हैं।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों से सीमा लंबे ट्रेनिंग सत्रों के लिए बेंगलुरु में रहती हैं तो उनकी मां को यही पता था कि वह वहीं हैं और सीमा ने नागोया जाते समय उन्हें यही मानने दिया।

सीमा ने पदक जीतने के बाद कहा, ‘‘मेरे पिता नहीं हैं। मेरी मां काफी बुजुर्ग हैं, लगभग 78 साल की। मेरा जन्म बहुत देर से हुआ था, जब वह 45 साल की थीं। जब भी मैं बाहर जाती हूं तो वह बहुत तनाव में आ जाती हैं। इसलिए, मैंने उन्हें नहीं बताया कि मैं एशियाई खेलों के लिए जापान जा रही हूं। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन जब भी उन्हें पता चलेगा, वह एक दिन तक सो नहीं पाएंगी। उन्हें उच्च रक्तचाप की समस्या है इसलिए जब भी मैं ट्रेनिंग शिविर या प्रतियोगिताओं के लिए जाती हूं, मैं उन्हें ज्यादा नहीं बताती। मैं केवल अपनी बहन को बताती हूं। ’’

सीमा ने अपनी बड़ी बहन को जानकारी दी थी और अब पदक जीतने के बाद उन्होंने शायद यह खबर फैला दी होगी।

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के रेटा गांव की रहने वाली 25 वर्षीय सीमा बृहस्पतिवार को महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में पदक जीतने वाली केवल तीसरी भारतीय बनीं। इससे पहले प्रीजा श्रीधरन और कविता राउत ने 2010 के एशियाई खेलों में क्रमशः स्वर्ण और रजत जीता था।

यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी मां अब जानती हैं कि वह कहां हैं तो सीमा ने कहा, ‘‘उन्हें (मां को) अब तक मेरी बहन से पता चल गया होगा, वह मुझे टेलीविजन पर देख रही होंगी। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘नहीं तो वह (मां) यही सोच रही होंगी कि मैं इस समय बेंगलुरु (साइ सेंटर) में हूं। ’’

सीमा ने कहा, ‘‘मेरी एक बड़ी बहन है। वह लगभग 45 साल की हैं। हम परिवार में छह (सदस्य) हैं। मैं सबसे छोटी हूं। ’’

सीमा जब 12 साल की थी, उनके पिता का निधन हो गया था और उन्होंने अपना सारा बचपन नंगे पैर मवेशी चराते हुए बिताया। उसकी मां ने एथलेटिक्स अपनाने में उसका साथ दिया, भले ही गांव वाले इसे नापसंद करते थे।

उन्होंने कहा, ‘‘यह मेरे पहले एशियाई खेल हैं। मुझे गर्व है कि मैंने कांस्य पदक जीता और मैंने अपना सपना साकार कर लिया है। ’’

भाषा नमिता पंत

पंत