लक्ष्य का साहसिक अभियान आल इंग्लैंड ओपन फाइनल में थमा, उपविजेता रहे

लक्ष्य का साहसिक अभियान आल इंग्लैंड ओपन फाइनल में थमा, उपविजेता रहे

लक्ष्य का साहसिक अभियान आल इंग्लैंड ओपन फाइनल में थमा, उपविजेता रहे
Modified Date: March 8, 2026 / 07:47 pm IST
Published Date: March 8, 2026 7:47 pm IST

बर्मिंघम, आठ मार्च (भाषा) लक्ष्य सेन ने पूरा जुझारूपन दिखाया लेकिन आल इंग्लैंड बैडमिंटन खिताब के लिये भारत का 25 साल का इंतजार खत्म नहीं कर सके और पुरूष एकल फाइनल में रविवार को चीनी ताइपै के लिन चुन यी से हार गए ।

चार साल पहले उपविजेता रहे लक्ष्य दूसरी बार आल इंग्लैंड फाइनल खेल रहे थे । अलमोड़ा के 24 वर्ष के इस खिलाड़ी को 57 मिनट तक चले मुकाबले में 15 . 21, 20 . 22 से पराजय झेलनी पड़ी ।

लिन आल इंग्लैंड पुरूष एकल खिताब जीतने वाले चीनी ताइपै के पहले खिलाड़ी बन गए ।

भारत के लिये प्रकाश पादुकोण (1980) और पुलेला गोपीचंद (2001) ही आल इंग्लैंड पुरूष एकल खिताब जीत सके हैं । प्रकाश नाथ (1947) और साइना नेहवाल (2015) भी करीब पहुंचे थे लेकिन उपविजेता रहे ।

लक्ष्य ने फाइनल की राह में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी शि यू की और छठे नंबर के खिलाड़ी लि शि फेंग को हराया था ।

कनाडा के विक्टर लेइ के खिलाफ 97 मिनट तक चले सेमीफाइनल में उन्हें ऐंठन और पैर के छालों से भी जूझना पड़ा ।

रविवार को कोर्ट पर उतरने से पहले तक वह टूर्नामेंट के दौरान पांच घंटे और 16 मिनट कोर्ट पर बिता चुके थे जो लिन से डेढ घंटा अधिक था । इस थकान का असर उनके प्रदर्शन पर पड़ा ।

दोनों जांघ पर पट्टी बांधकर खेल रहे लक्ष्य ने धीमी शुरूआत की और 0 . 3 से पिछड़ गए । लिन ने काफी आक्रामक शुरूआत करके दमदार स्मैश लगाते हुए 6 . 2 से बढत बना ली ।

लक्ष्य ने स्कोर 7 . 8 किया लेकिन लिन ने लगातार बढत बनाये रखी । सीधे और क्रॉसकोर्ट स्मैश लगाने में माहिर लिन ने 18 . 13 की बढत कर ली ।

लक्ष्य ने लंबी रेलियों के साथ वापसी की कोशिश की लेकिन लिन ने पहला गेम 24 मिनट में गंवा दिया । दूसरे गेम में भी यही कहानी रही ।

लिन की गलतियों का फायदा उठाकर लक्ष्य ने 7 . 4 से बढत बनाई जो 9 . 4 की हो गई । लक्ष्य ने ब्रेक के समय तक वापसी की कोशिश की और जल्दी ही स्कोर 14 . 14 हो गया ।

इसके बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच 46 शॉट की रेली देखने को मिली । लक्ष्य ने 18 . 16 की बढत बनाई लेकिन लिन ने 18 . 18 से वापसी की और इसके बाद लक्ष्य को कोई मौका नहीं दिया ।

भाषा मोना नमिता

नमिता


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