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Sudan Civil War: काहिरा, 29 मई (एपी) सूडान में ईद-उल-अजहा के दौरान एक इलाके में अर्द्धसैनिक बल से जुड़े लड़ाकों ने आम नागरिकों को निशाना बनाते हुए हमला किया जिसमें एक बुजुर्ग समेत 27 लोगों की मौत हो गई। एक मानवीय संगठन ने शुक्रवार को यह आरोप लगाया।
देश भर में इस तरह की हिंसा पर नजर रखने वाले संगठन ‘सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क’ ने अर्द्धसैनिक ‘रैपिड सपोर्ट फोर्सेज’ (आरएसएफ) से जुड़े लड़ाकों पर आरोप लगाया कि उन्होंने बृहस्पतिवार को उत्तरी कोर्डोफान में बराह कस्बे के पश्चिम में स्थित अल-मुर्रा इलाके के गांवों पर हमला किया।
#السودان | أعاد مقطع فيديو متداول لهجوم شنته مليشيا الدعم السريع الإرهابية المدعومة من الإمارات، أمس، على قرى بولاية شمال كردفان، إلى الأذهان مشاهد الجرائم والانتهاكات التي شهدتها قرى ولاية الجزيرة ومدينة الفاشر، وسط مخاوف متزايدة على حياة المدنيين، بعد تسجيل أكثر من 30 شهيداً،… pic.twitter.com/pokvYSCEqK
— Sudan News 🇸🇩 (@Sudan_tweet) May 29, 2026
संगठन ने कहा कि Sudan Civil War हमलों ने ‘‘युद्ध के कारण नागरिकों को पहले से ही झेलनी पड़ रही विनाशकारी परिस्थितियों को और बदतर कर दिया है।’’
सेना और आरएसएफ के बीच लंबे समय से सुलग रहा तनाव अप्रैल 2023 में और भड़क गया जिसके बाद पूर्ण युद्ध छिड़ गया। कोर्डोफान क्षेत्र इस संघर्ष का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां ड्रोन युद्ध समेत कई मोर्चों पर लड़ाई तेज होती जा रही है।
आरएसएफ और उसके सहयोगी पश्चिमी दारफुर क्षेत्र और दक्षिण सूडान की सीमा से लगे कोर्डोफान के कुछ हिस्सों पर काबिज हैं जो तेल के कुएं और सोने की खदानों से समृद्ध हैं। आरएसएफ और सेना के बीच बराह को लेकर भी कई बार झड़पें हो चुकी हैं।
बृहस्पतिवार को हुए ये हमले ईद-उल-अजहा यानी बकरीद के दूसरे दिन किए गए।
डॉक्टर्स नेटवर्क ने अपने बयान में कहा कि ‘‘गांवों और आम नागरिक को निशाना बनाना और इस भयावह तरीके से नरसंहार अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन है।’’
इसी महीने की शुरुआत में दक्षिण कोर्डोफान में विद्रोही समूह ‘सूडान पीपुल्स लिबरेशन मूवमेंट-नॉर्थ’ से जुड़े लड़ाकों और ओटोरो जनजाति के बीच भीषण झड़पों में नौ बच्चों सहित 61 से ज्यादा लोग मारे गए थे। पिछले हफ्ते मध्य सूडान में एक बाजार पर ड्रोन हमले में 28 लोगों की मौत हो गई थी।
अप्रैल 2023 में शुरू हुए इस युद्ध में अब तक कम से कम 59,000 लोग मारे जा चुके हैं, करीब 1 करोड़ 30 लाख लोग बेघर हो हुए हैं और देश के कई हिस्से अकाल की चपेट में आ गए हैं। तीन करोड़ से ज्यादा लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है।