नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) देश के खेल जगत ने मंगलवार को भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और इसे भारत में ओलंपिक आंदोलन के लिए एक बड़ी क्षति बताया।
दो दशकों से अधिक समय तक भारतीय खेल प्रशासन में प्रभावशाली हस्ती रहे 81 वर्षीय कलमाडी का मंगलवार तड़के पुणे के एक अस्पताल में निधन हो गया।
आईओए की वर्तमान अध्यक्ष पीटी उषा ने एक्स पर लिखा, ‘‘आईओए अध्यक्ष के रूप में मैं पूर्व आईओए अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी जी के निधन से बहुत दुखी हूं। वह लगभग दो दशक तक एएफआई के अध्यक्ष भी रहे, जहां उन्होंने भारत में एथलेटिक्स के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम शुरू किए। उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं। ओम शांति।’’
भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) के पूर्व सचिव और कलमाडी के लंबे समय तक सहयोगी रहे ललित भनोट ने इसे व्यक्तिगत क्षति बताते हुए कहा कि भारतीय खेलों खेल के विकास में कांग्रेस के पूर्व सांसद की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
भनोट ने कहा, ‘‘हमारे प्रिय मित्र और खेल जगत के दिग्गज के अचानक निधन की खबर सुनकर गहरा सदमा लगा है। भारतीय खेलों को आगे बढ़ाने में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वह लगभग दो दशकों तक एएफआई के अध्यक्ष रहे और उन्होंने खेलों को आगे बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम शुरू किए। वह एक समर्पित खेल प्रशासक थे जो भारतीय खेलों में कई बदलाव लाए। भारतीय ओलंपिक संघ के प्रमुख के रूप में उन्होंने एफ्रो-एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन किया तथा राष्ट्रीय खेलों को पुनर्जीवित किया।’’
भनोट ने कहा, ‘‘वह एक दिग्गज खेल प्रशासक और अद्भुत व्यक्ति थे। मैं उनके परिवार और सभी समर्थकों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। यह हमारे लिए व्यक्तिगत क्षति है। हम उन्हें हमेशा याद करेंगे। उनकी आत्मा को शांति मिले।’’
कलमाड़ी के साथ काम कर चुके आईओए के पूर्व महासचिव राजीव मेहता ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
मेहता ने कहा, ‘‘सुरेश कलमाड़ी के निधन से मैं बेहद दुखी हूं। उनका निधन भारतीय खेल जगत और भारत में ओलंपिक आंदोलन के लिए बहुत बड़ी क्षति है।’’
भारतीय तलवारबाजी संघ के वर्तमान महासचिव मेहता ने कहा, ‘‘मैं उनके परिवार, सहकर्मियों और खेल जगत से जुड़े सभी लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं और इस मुश्किल समय में उन्हें शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं। उनकी आत्मा को शांति मिले। भारतीय खेलों में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाए।’’
कलमाड़ी ने 1996 से 2011 तक आईओए के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इस तरह से वह देश की सर्वोच्च खेल संस्था का लंबे समय तक अध्यक्ष बने रहने वाले व्यक्तियों में से एक बन गए।
उन्होंने एशियाई एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया और विश्व एथलेटिक्स की सर्वोच्च संस्था आईएएएफ (अब विश्व एथलेटिक्स) की परिषद के सदस्य भी रहे, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के सबसे शक्तिशाली खेल प्रशासकों में से एक बन गए।
विश्व एथलेटिक्स के उपाध्यक्ष और एएफआई के प्रवक्ता आदिल सुमारीवाला ने कहा, ‘‘भारतीय ओलंपिक संघ और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कलमाडी के निधन पर गहरा शोक और खेद व्यक्त करता हूं। वह एक दिग्गज खेल प्रशासक थे। उनके परिवार के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं।’’
उनके कार्यकाल में भारत ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की जब निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने देश का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता।
बिंद्रा ने एक्स पर लिखा, ‘‘सुरेश कलमाड़ी के निधन की खबर सुनकर गहरा दुख हुआ। उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ईश्वर उन्हें इस मुश्किल समय में शक्ति प्रदान करें।’’
नयी दिल्ली में 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह इन खेलों की आयोजन समिति के अध्यक्ष थे। हालांकि भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोपों के कारण राष्ट्रमंडल खेलों का यह आयोजन विवादों में घिरा रहा था।
कलमाड़ी ने पुणे में एथलेटिक्स और खेल अवसंरचना के विकास में भी अहम भूमिका निभाई। उनके प्रयास से ही पुणे अंतरराष्ट्रीय मैराथन शुरू हुई थी जो भारतीय एथलेटिक्स के कैलेंडर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई।
भाषा
पंत आनन्द
आनन्द