Reported By: SATENDRA SINGH TOMAR
,Morena Education System / Image Source : SCREENGRAB
मुरैना: Morena Education System मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से शिक्षा व्यवस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो दावों की पोल खोल रही है। जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर सांगोली गांव का माध्यमिक विद्यालय आज भगवान भरोसे है। यहाँ 150 बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी जिन स्थायी शिक्षकों पर थी, उन्हें साहबों ने दफ्तरों में अटैच कर दिया है। नतीजा यह है कि स्कूल अतिथि शिक्षकों के भरोसे है और पिछले 8 दिनों से बच्चों के नसीब में मिड-डे मील का एक निवाला तक नहीं आया है।
शासकीय माध्यमिक विद्यालय सांगोली में कहने को तो 150 छात्रों का भविष्य गढ़ा जाता है, लेकिन हकीकत में यहाँ सिर्फ अव्यवस्थाओं का अंबार है। Education System Exposed 2026 स्कूल की छत जर्जर है और दीवारें डर पैदा करती हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहाँ पढ़ाने वाला कोई स्थायी शिक्षक नहीं है। जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षकों को स्कूलों से हटाकर दफ्तरों में अटैच कर दिया है। सांगोली स्कूल के प्रभारी रविंद्र सिंह कर्णावत नदारद रहते हैं और पूरा स्कूल चार अतिथि शिक्षकों के कंधों पर टिका है। इनमें से भी कोई छुट्टी पर रहता है तो कोई समय पर नहीं पहुंचता। ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ का नारा यहाँ की रसोई के ताले में कैद हो गया है। पिछले 8 दिनों से यहाँ मध्यान्ह भोजन नहीं बना है। बच्चे भूखे पेट पढ़ने को मजबूर हैं या फिर स्कूल ही नहीं आ रहे।
जब हमारी टीम ने पड़ताल की तो पता चला कि अधिकारियों की मिलीभगत से शिक्षकों का अटैचमेंट खेल धड़ल्ले से चल रहा है। अब इस पूरे मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि शिक्षकों के अटैचमेंट खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं। अगर अब भी कोई शिक्षक कार्यालय में अटैच है, तो संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होगी और कलेक्ट्रेट में अटैच शिक्षकों के विषय में कलेक्टर साहब से चर्चा की जाएगी। लेकिन ज़मीन पर सांगोली के बच्चों का भविष्य अंधेरे में है।
सवाल यह है कि जब स्थायी शिक्षक एसी कमरों और दफ्तरों की फाइलों में उलझे रहेंगे, तो गांव के इन बच्चों के सपनों को उड़ान कौन देगा? क्या शिक्षा विभाग इन बच्चों की सुध लेगा या फिर इसी तरह राम भरोसे चलती रहेगी पढ़ाई-लिखाई जहां बच्चों का भविष्य सिस्टम की लापरवाही की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है।
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