Reported By: Nasir Gouri
,Gwalior News/Image Credit: IBC24.in
Gwalior News: ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर के माफी औकाफ विभाग के दफ्तर में 16 जिलों के जमीनों के रिकॉर्ड रूम के रजिस्टरों में दीमक घुस चुकी हैं। बस्तों के पन्ने सड़कर टपकर रहे हैं, कौन सा रिकॉर्ड कहां रखा है कुछ पता ही नहीं है। यहां वर्ष 1920 तक के रिकॉर्ड रखे हुए हैं, रियासत काल का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया था। (Gwalior News) पहले ये मोतीमहल में था, लेकिन अब संभाग आयुक्त के दफ्तर में पहुंच गया। दस्तावेजों की हालत देखकर पीड़ित पक्षकार ओर वकील सरकारी सिस्टम की लापरवाही पर बड़े आरोप लगा रहे है।
पहले ग्वालियर के मोतीमहल के आठ कमरों में ग्वालियर संभाग के जिलों के मंदिरों का रिकॉर्ड रखा हुआ था। जिसे शिफ्ट कर यहां दो कमरों में कचरे की तरह भर दिया गया। यहां ग्वालियर स्टेट में शामिल रहे। मध्य प्रदेश के 16 जिलों का माफी रिकॉर्ड जमा है, जिनमें ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, भिंड, श्योपुर, अशोकनगर, मुरैना सहित टीकमगढ़, छतरपुर और जबलपुर जिले शामिल हैं। तस्वीर वायरल होने के बाद, संभाग आयुक्त ने जांच के आदेश दे दिए है। हैरत की बात ये है संभागीय माफी कार्यालय की मानीटरिंग की जिम्मेदारी संभागायुक्त की होती है, जो कि वर्तमान में मनोज खत्री हैं। (Gwalior News) अब रिकॉर्ड ही पूरा नष्ट हो जाएगा तो जमीनों में हेरफेर कौन रोक सकता है, यह पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल है।
रिकोर्ड रूम के जो जमीनों के दस्तावेज है, उनमें एक फाइल थी, जिस पर पूरी तरह से दीमक लगी हुई है, उस पर लिखा हुआ था सरकार श्रीमंत महाराज जीवाजीराव साहेब शिंदे, आलीजाह सन 1920 ई संवत 1985 लिखा है। रिकॉर्ड रूम में कार्यालय संभाग आयुक्त ग्वालियर का पेज चिपका हुआ है। (Gwalior News) एक बस्ते पर तहकीकात मिसलें, परगना-मेहगांव व नए व पुराने क्रमांक लिखे हैं। महत्वपूर्ण रिकॉर्ड इस तरह सड़कर नष्ट हो जाने से माफी की संपत्तियों को लेकर बड़े हेरफेर हो सकते हैं। ग्वालियर संभाग में पहले ही करोड़ों के जमीन घोटाले चल रहे हैं, एक मामला तो 1200 करोड़ का लंबित है, जिसमें माफी की संपत्तियों को दूसरे के नाम चढ़ा दिया गया।
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