सुरेश कलमाड़ी का सफर: वायु सेना के पायलट से लेकर भारत के अग्रणी खेल प्रशासक तक

सुरेश कलमाड़ी का सफर: वायु सेना के पायलट से लेकर भारत के अग्रणी खेल प्रशासक तक

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  • Publish Date - January 6, 2026 / 01:40 PM IST,
    Updated On - January 6, 2026 / 01:40 PM IST

नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) सुरेश कलमाड़ी बेहद कुशल प्रशासक थे लेकिन इसके साथ ही उनका विवादों से भी नाता रहा और उन्हें हमेशा आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद वह दो दशक से अधिक समय तक विभिन्न भूमिकाओं में भारत के सबसे प्रभावशाली खेल प्रशासकों में से एक रहे।

भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के पूर्व अध्यक्ष कलमाड़ी का आज सुबह पुणे में निधन हो गया। वह बेहद करिश्माई व्यक्ति थे, जिनकी भारतीय खेलों पर पकड़ ने सफलता और विवाद दोनों को जन्म दिया।

मद्रास (अब चेन्नई) में 1944 में जन्मे कलमाड़ी ने पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज में पढ़ाई की। उन्होंने बाद में इस शहर का संसद में प्रतिनिधित्व किया।

लेकिन राजनीति में प्रवेश करने या खेल प्रशासन में आने से पहले कलमाड़ी ने 1964 से 1974 तक भारतीय वायु सेना में सेवा की। उन्होंने स्क्वाड्रन लीडर के रूप में सेवानिवृत्त होने से पहले वायुसेना में पहले एक कमीशन पायलट के रूप में और फिर एक प्रशिक्षक के रूप में काम किया।

शरद पवार की नजर उन पर पड़ी और उसके बाद उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ। उन्हें पुणे युवा कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया और बाद में उन्होंने संजय गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए।

अस्सी के दशक के उत्तरार्ध में कांग्रेस के विभाजन के बाद कलमाड़ी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ बने रहे तथा 1982, 1988, 1994 और 1998 में राज्यसभा के लिए चुने गए।

राज्यसभा सांसद के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान वह 1995 में पीवी नरसिम्हा राव सरकार में रेल राज्य मंत्री भी रहे।

कलमाड़ी 1996 में पुणे से लोकसभा के लिए चुने गए थे, लेकिन अगले आम चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने 2004 और 2009 के चुनावों में जीत हासिल करके शानदार वापसी की।

लेकिन उन्हें खेल प्रशासक के रूप में अधिक प्रसिद्ध मिली और इसके कारण उन्हें बदनामी भी झेलनी पड़ी।

उनके नेतृत्व में भारत ने कई प्रमुख प्रतियोगिताओं की मेजबानी की जिनमें 2003 के एफ्रो एशियाई खेल, 2008 के राष्ट्रमंडल युवा खेल, 2010 के राष्ट्रमंडल खेल के अलावा 1989 और 2013 में एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप शामिल हैं।

आईओए प्रमुख के रूप में उनका कार्यकाल 1996 से 2011 तक चला। वर्ष 2011 में उन पर राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में भ्रष्टाचार के आरोप लगे, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। हालांकि पिछले साल अप्रैल में प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें इस मामले में क्लीन चिट दे दी।

आमतौर पर मृदुभाषी और कम बोलने वाले कलमाड़ी को इस घोटाले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रखा। वह अब तक के सबसे महंगे राष्ट्रमंडल खेलों में हुई हर गड़बड़ी का चेहरा बन गए। तब वह इसकी आयोजन समिति के अध्यक्ष थे।

उन्होंने किसी भी प्रकार के गड़बड़ी करने के आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया लेकिन उनके यह दावे जनता के आक्रोश और समाचार चैनलों की बहसों के शोरगुल में दब गए। इससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा लेकिन कलमाड़ी को यहीं तक सीमित नहीं किया जा सकता है।

आईओए के प्रमुख के रूप में उनकी सबसे बड़ी सफलताओं में से एक राष्ट्रीय खेलों को पुनर्जीवित करना था। उनके अध्यक्ष रहते हुए पुणे, बेंगलुरु, चंडीगढ़, हैदराबाद और मणिपुर सहित विभिन्न स्थानों पर नियमित अंतराल पर राष्ट्रीय खेलों का सफल आयोजन किया गया।

वह भारतीय एथलेटिक्स से बेहद करीब से जुड़े रहे तथा इस बीच 1987 से 2006 तक 19 वर्षों तक भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) के अध्यक्ष भी रहे।

इस दौरान वह 1989 से 1998 तक दिल्ली में आयोजित आठ प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए अंतरराष्ट्रीय ट्रैक और फील्ड सितारों को बुलाने में सफल रहे। ​​उन्होंने पुणे अंतरराष्ट्रीय मैराथन के आयोजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जो भारतीय एथलेटिक्स कैलेंडर का अहम हिस्सा बन गया।

नयी दिल्ली ने उनके नेतृत्व में 1989 में देश के इतिहास में पहली बार एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप की मेजबानी भी की थी। वह 2001 में एशियाई एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष चुने गए और उन्होंने 1990 में एशियाई ग्रां प्री एथलेटिक्स प्रतियोगिता की शुरुआत की।

उन्होंने 2013 में एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप को पुणे में भी आयोजित करवाया था, लेकिन अपने गृहनगर में महाद्वीपीय प्रतियोगिता से ठीक पहले हुए चुनावों में वह एशियाई एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष पद के चुनाव में दहलान अल हमाद से हार गए थे।

वह 2001 से 2015 तक विश्व एथलेटिक्स परिषद के सदस्य रहे। यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह पहले भारतीय बने थे। इसके बाद उन्होंने 2004 में नयी दिल्ली में विश्व हाफ मैराथन का आयोजन भी किया।

कलमाड़ी को ओलंपिक खेलों के बारे में जागरूकता लाने में उनकी भूमिका के लिए 2008 में बीजिंग में राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों के संघ (एएनओसी) पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

उनके कार्यकाल में भारत ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की जब निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने देश का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता।

भाषा

पंत

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