सूर्यवंशी को जल्द से जल्द राष्ट्रीय टीम में शामिल किया जाए : मदन लाल

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सूर्यवंशी को जल्द से जल्द राष्ट्रीय टीम में शामिल किया जाए : मदन लाल

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  • Publish Date - June 1, 2026 / 06:40 PM IST,
    Updated On - June 1, 2026 / 06:40 PM IST

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) विश्व कप 1983 विजेता मदन लाल का कहना है कि युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी के पास सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली और सुनील गावस्कर जैसी प्रतिभा और सोच है और वह चाहते हैं कि इस 15 साल के खिलाड़ी को जल्द से जल्द राष्ट्रीय टीम में शामिल किया जाए।

हालांकि लाल ने कहा कि अगर सूर्यवंशी को तेंदुलकर जैसे दिग्गजों की श्रेणी में शामिल होना है तो उन्हें टेस्ट क्रिकेट में भी खुद को साबित करना होगा।

मदन लाल ने सोमवार को कहा, ‘‘वह (सूर्यवंशी) बहुत प्रतिभाशाली है। सच में उसके पास सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली, कपिल देव और सुनील गावस्कर जैसी भगवान की दी हुई प्रतिभा और सोच है। ’’

इस पूर्व आल राउंडर ने कहा, ‘‘ऐसे खिलाड़ी सदी में एक बार आते हैं। लेकिन उनकी तरह महान बनने के लिए, उसे टेस्ट क्रिकेट में भी खुद को साबित करना होगा। आयरलैंड के खिलाफ, भारत ए और तीन दिवसीय मैचों में खेलने से वह भारतीय क्रिकेट के मुख्य ढांचे में अच्छी तरह से ढल जाएगा। ’’

सूर्यवंशी को अभी-अभी खत्म हुए आईपीएल में ‘मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर’ चुना गया। वह बल्लेबाजी सूची में सबसे ऊपर रहे, उन्होंने 16 पारियों में 48.50 की औसत और 237.30 के शानदार स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए। उन्होंने एक शतक और पांच अर्धशतक लगाकर ‘ऑरेंज कैप’ जीती। उन्होंने वेस्टइंडीज के क्रिस गेल के एक सत्र में सबसे ज्यादा छक्के (59) लगाने के पिछले आईपीएल रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया क्योंकि उन्होंने आईपीएल 2026 में 72 छक्के जड़े।

लाल ने कहा कि टी20 अंतरराष्ट्रीय में सूर्यवंशी भारत के मौजूदा शीर्ष तीन बल्लेबाजों की तरह ही बेहतरीन हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें डर है कि ‘सूर्यवंशी की वजह से कुछ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को टीम से बाहर किया जा सकता है।’

उन्होंने कहा, ‘‘सूर्यवंशी भी अभिषेक, संजू और ईशान जितने ही बेहतरीन हैं। लेकिन ये खिलाड़ी खुद को साबित कर चुके हैं जबकि सूर्यवंशी को अभी उस स्तर पर खुद को साबित करना बाकी है। ’’

भारत के पूर्व कोच रह चुके लाल ने कहा, ‘‘कोई भी सूर्यवंशी जैसी बल्लेबाजी नहीं कर सकता। जिस तरह का खेल उन्होंने दुनिया को दिखाया है, वह अविश्वसनीय है। हर कोच चाहेगा कि वह खेले, लेकिन टीम का संतुलन भी देखना पड़ता है। उसे बाहर नहीं बैठना चाहिए, वरना उसका आत्मविश्वास कम हो जाएगा। उसे किसी भी चीज से बचाने का तो कोई सवाल ही नहीं है। ’’

भाषा नमिता आनन्द

आनन्द