ब्रिटेन के इस्पात, कार्बन कर नियमों पर भारत करेगा चर्चा, एफटीए की राह में बने अ़ड़चन

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ब्रिटेन के इस्पात, कार्बन कर नियमों पर भारत करेगा चर्चा, एफटीए की राह में बने अ़ड़चन

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  • Publish Date - June 1, 2026 / 06:40 PM IST,
    Updated On - June 1, 2026 / 06:40 PM IST

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) ब्रिटेन के नए इस्पात आयात नियमों और कार्बन कर व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भारत और ब्रिटेन इस सप्ताह चर्चा करेंगे। ये मुद्दे दोनों देशों के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लागू करने की राह में अड़चन बन गए हैं।

सूत्रों ने सोमवार को कहा कि ब्रिटेन के व्यापार एवं व्यवसाय मंत्री पीटर काइल की दो जून को होने वाली भारत यात्रा के दौरान इन मुद्दों पर प्रमुखता से चर्चा होने की उम्मीद है।

काइल वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ एक द्विपक्षीय बैठक में शिरकत करेंगे।

सूत्रों के मुताबिक, इन मुद्दों का हल नहीं निकलने तक व्यापार समझौते को पूरी तरह लागू कर पाना मुश्किल होगा।

भारत और ब्रिटेन ने 24 जुलाई, 2025 को व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

ब्रिटेन एक जुलाई, 2026 से इस्पात आयात पर सख्ती करने जा रहा है। वह शुल्क-मुक्त इस्पात आयात की सीमा 60 प्रतिशत तक घटाएगा। इस सीमा से ज्यादा आयात करने पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगेगा।

यह उपाय उन इस्पात उत्पादों के आयात पर लागू होगा, जिनका उत्पादन ब्रिटेन में भी किया जा सकता है।

इसके अलावा, ब्रिटेन 2027 से कार्बन कर व्यवस्था लागू करने की तैयारी में भी है। इससे लोहा, इस्पात, एल्युमिनियम, उर्वरक एवं सीमेंट जैसे उन उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगेगा, जिनके उत्पादन में ज्यादा प्रदूषण होता है।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन में कार्बन कर लगने से भारत के करीब 77.5 करोड़ डॉलर के निर्यात पर असर पड़ सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, भारत इस मुद्दे पर संतुलन बनाने के लिए ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की पर दी गई रियायतों की समीक्षा कर सकता है। इस समझौते के तहत भारत ने ब्रिटेन की व्हिस्की पर आयात शुल्क 150 प्रतिशत से धीरे-धीरे घटाकर 40 प्रतिशत करने की बात कही है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय