वेस्टइंडीज के महान क्रिकेटर सर गारफील्ड सोबर्स का निधन

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वेस्टइंडीज के महान क्रिकेटर सर गारफील्ड सोबर्स का निधन

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  • Publish Date - July 17, 2026 / 10:15 PM IST,
    Updated On - July 17, 2026 / 10:15 PM IST

ब्रिजटाउन (बारबाडोस), 17 जुलाई (भाषा) क्रिकेट ने शुक्रवार को सर गारफील्ड सोबर्स के निधन के साथ अपने सबसे प्रतिष्ठित और महानतम सितारों में से एक को खो दिया। वेस्टइंडीज के इस बेजोड़ दिग्गज की अद्वितीय ऑलराउंड क्षमता, शानदार कौशल और खेल पर असाधारण प्रभाव ने उन्हें क्रिकेट इतिहास के सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में स्थान दिलाया।

वह 89 वर्ष के थे और उनके निधन के साथ ऐसी विरासत का अंत हुआ जो कई पीढ़ियों तक प्रेरणा देती रहेगी।

पूर्व वेस्टइंडीज कप्तान के निधन की पुष्टि उनके बेटे डेनियल ने की।

सोबर्स का जन्म 1936 में बारबाडोस के ब्रिजटाउन में हुआ था।

खेल के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडरों में से एक सोबर्स ने मार्च 1954 से अप्रैल 1974 के बीच 93 टेस्ट मैच खेले और 57.78 की औसत से 8,032 रन बनाए जिसमें 26 शतक और 30 अर्धशतक शामिल थे।

बाएं हाथ के बल्लेबाज सोबर्स बाएं हाथ से तेज गेंदबाजी करने के साथ-साथ कलाई के साथ स्पिन और उंगली से की जाने वाली स्पिन गेंदबाजी करने में भी सक्षम थे। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 235 विकेट हासिल किए। उन्होंने केवल एक वनडे मैच खेला, जिसमें एक विकेट लिया। वह बेहतरीन क्षेत्ररक्षक भी थे।

वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक ओवर में छह छक्के लगाने वाले पहले बल्लेबाज भी थे, उन्होंने 1968 में नॉटिंघमशर के लिए खेलते हुए ग्लेमोर्गन के खिलाफ यह कारनामा किया था।

क्रिकेट वेस्टइंडीज ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘एक महान पारी का अंत हो गया। सर गारफील्ड सोबर्स अब और हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे। ’’

भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने कहा कि सोबर्स ऐसी ‘अमर विरासत’ छोड़ गए हैं जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

बीसीसीआई ने लिखा, ‘‘बीसीसीआई सर गारफील्ड सोबर्स के निधन पर शोक व्यक्त करता है। वह खेल के सच्चे प्रतीक और क्रिकेट के महानतम ऑलराउंडरों में से एक थे। ’’

बीसीसीआई ने कहा कि उनकी असाधारण उपलब्धियां, कैरेबियाई क्रिकेट पर उनका स्थायी प्रभाव और वैश्विक खेल में उनका अतुलनीय योगदान ऐसी विरासत है जो पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

नॉटिंघमशर ने अपने बयान में कहा, ‘‘नॉटिंघमशर को सर गारफील्ड सोबर्स के निधन की खबर सुनकर बेहद दुख हुआ। ’’

क्लब ने कहा, ‘‘काउंटी चैंपियनशिप में विदेशी खिलाड़ियों के खेलने के नियमों में ढील दिए जाने के कुछ समय बाद ही ट्रेंट ब्रिज पहुंचे सोबर्स को तुरंत कप्तान बना दिया गया और उन्होंने इंग्लिश घरेलू क्रिकेट के अपने पहले ही सत्र में नॉटिंघमशर को 15वें स्थान से चौथे स्थान पर पहुंचा दिया। ’’

क्लब ने कहा, ‘‘वह सत्र तब खत्म हुआ जब सोबर्स प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक ही ओवर की छह गेंदों पर लगातार छह छक्के लगाने वाले पहले बल्लेबाज बने।उन्होंने स्वानसी में ग्लेमोर्गन के खिलाफ यह कारनामा किया था। ’’

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) का सालाना पुरस्कार उनके सम्मान में ‘सर गारफील्ड सोबर्स’ पुरस्कार के नाम से दिया जाता है। यह पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों में सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को दिया जाता है।

सोबर्स ने 1965 से 1972 के बीच 39 टेस्ट मैच में वेस्टइंडीज की कप्तानी की। उनकी कप्तानी में टीम ने नौ मैच जीते, 20 ड्रॉ खेले और 10 मैच गंवाए।

उन्होंने 16 वर्ष की उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया और इसके एक वर्ष बाद किंग्सटन में इंग्लैंड के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच खेला।

पाकिस्तान के खिलाफ फरवरी 1958 में किंग्सटन में सोबर्स का बनाया गया 365 रन (38 चौके) का स्कोर उस समय टेस्ट क्रिकेट में किसी भी बल्लेबाज का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर था। उन्होंने यह उपलब्धि 23 वर्ष की उम्र में हासिल की थी और यह रिकॉर्ड 36 वर्षों तक कायम रहा।

अपने करियर में सोबर्स ने कुल 383 प्रथम श्रेणी मैच खेले और 54.87 की औसत से 28,314 रन बनाए जिसमें 86 शतक और 121 अर्धशतक शामिल थे। उन्होंने इस स्तर पर 1,043 विकेट भी लिए।

बतौर बल्लेबाज सोबर्स का प्रदर्शन भारत के खिलाफ विशेष रूप से शानदार रहा। भारत के खिलाफ उन्होंने 18 टेस्ट मैच में 1,920 रन बनाए जिसमें आठ शतक और सात अर्धशतक शामिल थे।

इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 10 शतक और 13 अर्धशतक जड़ते हुए 60.64 की औसत से 3,214 रन बनाए।

वहीं ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने 43.14 की औसत से 1,510 रन बनाए जिसमें चारशतक और छह अर्धशतक शामिल थे।

न्यूजीलैंड के खिलाफ हालांकि उनका प्रदर्शन अपेक्षाकृत साधारण रहा। 12 टेस्ट मैच में उन्होंने 23.76 की औसत से केवल 404 रन बनाए जिसमें एकमात्र शतक शामिल था।

पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने आठ टेस्ट मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन शतक और चार अर्धशतक लगाए तथा 89.45 की बेहतरीन औसत से रन बनाए।

सोबर्स के टेस्ट करियर का सबसे सफल वर्ष 1958 रहा। इसी साल उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 365 रन की अपनी ऐतिहासिक पारी खेली थी। उस वर्ष उन्होंने केवल आठ टेस्ट मैच में 1,299 रन बनाए, जिसमें कुल छह शतक और तीन अर्धशतक शामिल थे। इस दौरान उनका बल्लेबाजी औसत 144.33 रहा।

गेंदबाज के रूप में भी सोबर्स का प्रदर्शन इंग्लैंड के खिलाफ सबसे प्रभावशाली रहा। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 32.57 की औसत से 102 विकेट हासिल किए। इसके अलावा उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 51 विकेट और भारत के खिलाफ 59 विकेट चटकाए।

सोबर्स वेस्टइंडीज क्रिकेट इतिहास में सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में चौथे स्थान पर हैं और कैरेबियाई टीम के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वालों की सूची में आठवें स्थान पर हैं।

क्रिकेट में उनके योगदान के लिए उन्हें 1975 में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय द्वारा ‘नाइटहुड’ से सम्मानित किया गया। वर्ष 2000 में उन्हें विजडन के पांच ‘क्रिकेटर ऑफ द सेंचुरी’ में भी शामिल किया गया।

भाषा नमिता मोना

मोना