राफेल पर अजय माकन का बयान-सरकारी उपक्रम को हटाकर रिलायंस को दिया गया काम

राफेल पर अजय माकन का बयान-सरकारी उपक्रम को हटाकर रिलायंस को दिया गया काम

राफेल पर अजय माकन का बयान-सरकारी उपक्रम को हटाकर रिलायंस को दिया गया काम
Modified Date: November 29, 2022 / 08:38 pm IST
Published Date: December 20, 2018 10:54 am IST

रायपुर। पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन ने राफेल डील पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया। अजय माकन ने राफेल डील को सबसे बड़ा घोटाला बताया है।

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अजय माकन ने कहा कि केंद्र सरकार ने राफेल विमान खरीद मामले पर जनता और सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने का किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यह बयान प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही।  सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा है कि भ्रष्टाचार नहीं हुआ है। अजय माकन ने बताया कि दो हफ्ते पहली बनी कंपनी को काम दिया गया। HAL से मार्च 2014 में करार हुआ था। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री के साथ सीएम भूपेश बघेल भी मौजूद थे।

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कांग्रेस की यूपीए सरकार के दौरान 12 दिसंबर, 2012 को खुली अंतर्राष्ट्रीय बोली के अनुसार 126 राफेल लड़ाकू जहाजों में से प्रत्येक लड़ाकू जहाज का मूल्य 526.10 करोड़ रुपए यानि 36 लड़ाकू जहाजों का मूल्य 18,940 करोड़ रु. था।

मोदी सरकार ने 36 राफेल लड़ाकू जहाज 7.5 बिलियन यूरो (1670.70 करोड़ रु. प्रति लड़ाकू जहाज) यानि 36 जहाजों के लिए 60,145 करोड़ रु. में खरीदे। इस सौदे में सरकारी खजाने को 41,205 करोड़ रु. का चूना लगा।

30,000 करोड़ रु. का ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट पीएसयू – हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के हाथों से लेकर अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस कंपनी को दे दिया गया

प्रधानमंत्री मोदी ने एचएएल से 30,000 करोड़ रु. का कॉन्ट्रैक्ट छीनकर पब्लिक सेक्टर की कंपनी से ज्यादा निजी कंपनी के हितों का ख्याल क्यों रखा।

डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीज़र ‘कैबिनेट कमेटी आॅन सिक्योरिटी’ एवं ‘डिफेंस एक्विज़िशन काउंसिल’ को उठाकर ताक पर रख दिया। लड़ाकू जहाजों की संख्या घटाई एवं ‘ट्रांसफर ऑफ टेक्नॉलॉजी’ की बलि दे डाली।

भारतीय वायु सेना को कम से कम 126 ऑपरेशनल लड़ाकू जहाजों की जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय वायु सेवा के लिए खरीदे जाने वाले लड़ाकू जहाजों की संख्या 126 से घटाकर 36 क्यों कर दी इस मामले में भारतीय वायुसेना का परामर्श क्यों नहीं लिया गया।

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पूर्व केंद्रीय मंत्री के अनुसार सरकारी उपक्रम को हटाकर रिलायंस को काम दिया गया। यही नहीं एक लाख करोड़ रूपए का मेंटनेंस का काम भी इसी कंपनी को दिया गया। 12 दिसंबर 2012 को टेंडर खुले तो 126 राफेल की कीमत 526 करोड़ थे। लेकिन बाद में लगभग 1671 करोड़ रूपए के हो गए। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार राफेल को 41205 करोड़ रूपए महंगा खरीद रही है।


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