अदालत ने वकील की गिरफ्तारी को लेकर सवालों के जवाब नहीं देने को लेकर पुलिस को फटकार लगायी

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अदालत ने वकील की गिरफ्तारी को लेकर सवालों के जवाब नहीं देने को लेकर पुलिस को फटकार लगायी

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  • Publish Date - May 17, 2021 / 10:12 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:45 PM IST

मुंबई, 17 मई (भाषा) पुलिस को सोमवार को तब बम्बई उच्च न्यायालय की नाराजगी का सामना करना पड़ा जब वह अपहरण के आरोप में एक वकील की गिरफ्तारी पर कुछ सवालों के जवाब देने में विफल रही।

न्यायमूर्ति एस जे कथावाला और न्यायमूर्ति एस पी तावड़े की एक पीठ वकील विमल झा की गिरफ्तारी से जुड़ी दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में से एक अर्जी खुद आरोपी ने दायर की थी जबकि दूसरी ‘लॉयर्स फॉर जस्ट सोसाइटी’ नामक एक समूह द्वारा दायर की गई है। दोनों ही अर्जियों में दलील दी गई है कि पिछले महीने की गई गिरफ्तारी अवैध थी।

दलीलों में दावा किया गया है कि पुलिस ने गिरफ्तारी के दौरान सीआरपीसी मानदंडों के साथ-साथ उच्चतम न्यायालय के आदेशों का भी उल्लंघन किया।

अर्जियों के अनुसार झा को 3 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था लेकिन 5 अप्रैल को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। हालांकि सीआरपीसी में कहा गया है कि किसी को भी 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना चाहिए।

अर्जियों के अनुसार जब झा को जब अदालत में पेश किया गया तो उन्हें हथकड़ी लगायी गई थी जबकि उच्चतम न्यायालय का निर्देश है कि किसी भी आरोपी को तब तक हथकड़ी नहीं लगायी जाएगी जब तक कि किसी मजिस्ट्रेट से आदेश नहीं लिया जाता है।

राज्य सरकार के वकील, मुख्य लोक अभियोजक दीपक ठाकरे ने याचिकाकर्ताओं के आरोपों से इनकार किया और पीठ को बताया कि झा को 4 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था और 5 अप्रैल को मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया था।

बाद में उन्होंने कहा कि झा को 3 अप्रैल को पुलिस थाने बुलाया गया था, लेकिन 5 अप्रैल को सुबह करीब 4 बजे प्राथमिकी दर्ज की गई और उसके बाद ही उन्हें गिरफ्तार किया गया।

जब पीठ ने ठाकरे से संबंधित पुलिस थाने से सीसीटीवी फुटेज मांगी ताकि इसकी पुष्टि की जा सके तो ठाकरे ने कहा कि झा की गिरफ्तारी के समय पुलिस थाने में सीसीटीवी कैमरे नहीं थे और सीसीटीवी कैमरे इस साल 1 मई को ही लगाए गए थे।

ठाकरे ने अदालत से यह भी कहा कि झा को हथकड़ी इसलिए लगाई गई थी क्योंकि पुलिस को मामले में एक सह-आरोपी द्वारा सूचित किया गया था कि झा हिरासत से ‘भाग’ सकते हैं।

पीठ ने इन दलीलों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए ठाकरे को उच्चतम न्यायालय के आदेशों की याद दिलाई जिसमें कहा गया है कि सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए।

अदालत ने कहा, ‘‘कितने पुलिस थानों में सीसीटीवी नहीं है और क्यों? एक वकील सलाखों के पीछे है। कृपया इस मामले को गंभीरता से लें। उसे थाने में बुलाने कौन गया था? कौन अधिकारी उसे बुलाने गया था? आप बार-बार हमारे सामने झूठे बयान क्यों दे रहे हैं ?’

अदालत ने यह भी पूछा कि क्या झा ‘कोई बड़े अपराधी’ थे कि उन्हें हथकड़ी लगानी पड़ी।

पीठ ने ठाकरे को निर्देश दिया कि वह पुलिस द्वारा अब तक की गई जांच पर बुधवार तक एक हलफनामा दाखिल करायें और यह भी ब्योरा दिया जाए कि झा को कब पुलिस थाने लाया गया और कब गिरफ्तार किया गया।

अदालत ने ठाकरे से यह भी कहा कि वे हलफनामा तैयार करने वाले अधिकारियों को कोई भी गलत बयान देने से सावधान करें।

अदालत ने आगाह किया, ‘‘श्रीमान ठाकरे, कृपया अदालत के बाहर अपनी ड्यूटी करें और अधिकारियों से बहुत सावधान रहने के लिए कहें। अगर पुलिस ऐसा व्यवहार करेगी… हमें सीबीआई या किसी अन्य एजेंसी से जांच के लिए कहने के लिए मजबूर न करें।’’

याचिका के अनुसार झा को खारघर पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जब उनके एक मुवक्किल ने अपहरण और जबरन वसूली का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।

याचिकाकर्ताओं के वकील सुभाष झा और प्रशांत पांडेय ने अदालत को बताया कि इस मुवक्किल के नाम से कई आपराधिक शिकायतें थीं और झा अदालत की सुनवाई के सिलसिले में उसके साथ कई जगहों पर गए थे। उन्होंने कहा कि अपहरण और जबरन वसूली का मामला झूठा है।

अदालत ने 19 मई को याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखेगी।

भाषा

अमित अनूप

अनूप