IBC24 की खास मुहिम ‘जनता मांगे हिसाब’ में इस चुनावी समर के बीच जनता की नब्ज टटोलने IBC24 की टीम बुधवार को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की एकमात्र सीट कोंटा पहुंची। इस सीट पर कांग्रेस लगातार जीत का परचम लहराती आ रही है. बीजेपी हर बार तगड़ी रणनीतियां बनाती हैं लेकिन फिर भी जीत हासिल नहीं हो पाती। सबसे पहले कोंटा विधानसभा की भौगोलिक स्थिति पर नजर डालते हैं।
कोंटा विधानसभा
सुकमा जिले की एकमात्र सीट
नक्सल प्रभावित और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र
खनिज संपदा से भरपूर
क्षेत्रफल- 2256.21 वर्ग किमी
जनसंख्या- 2,49,841
मतदाता-1,54,746
वर्तमान कांग्रेस विधायक हैं कवासी लखमा
अब बात कोंटा विधानसभा की सियासी तस्वीर की। कोंटा सीट पर कांग्रेस बेहद मजबूत नजर आती है। साल 2008 में बीजेपी ने बस्तर की 11 सीटें जीती लेकिन कोंटा एकमात्र ऐसी सीट थी जिस पर बीजेपी जीत ना सकी…हालांकि सीपीआई ने जरुर इस सीट पर दो बार जीत दर्ज की। इस सीट से 3 बार से कांग्रेस विधायक हैं कवासी लखमा..अब चुनाव नजदीक हैं तो बीजेपी कांग्रेस में टिकट के दावेदार भी सामने आने लगे हैं ।
कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है कोंटा विधानसभा सीट…यही वजह है की बीते तीन चुनावों में कांग्रेस जीत का परचम लहराती आ रही है..कोंटा से पिछले 3 बार से विधायक कवासी लखमा हैं… इस विधानसभा सीट पर सीपीआई का भी प्रभाव दिखता है, चुनावी इतिहास में 2 बार सीपीआई ने भी इस विधानसभा पर जीत दर्ज की है.. सीपीआई के नेता मनीष कुंजाम हैं, और राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी नेता की पहचान रखते हैं…बात बीजेपी की करें तो लगातार सरकार में रहने के बाद भी कोंटा विधानसभा सीट जीत नहीं पाई… यहां तक की साल 2008 में हुए चुनाव में बस्तर की 11 विधानसभा सीटें जीतने के बावजूद कोंटा विधानसभा बीजेपी हार गई..वर्तमान सियासी तस्वीर की बात करें तो बीजेपी दो गुटों में बटी नजर आती है इसीलिए रामप्रताप को संगठन की जिम्मेदारी दी गई है..ताकी गुटबाजी से पार पाया जा सके…बीजेपी के सामने सबसे बढ़ी परेशानी ये है कि कोई सर्वमान्य चेहरा नहीं है..
तो वहीं कांग्रेस में कवासी लखमा एक मात्र चेहरा हैं और लगातार विजयी होते आ रहे हैं…अब चुनाव नजदीक हैं तो विधायक के टिकट के लिए दावेदारी शुरु हो गई है… बीजेपी में दावेदारों की लिस्ट कुछ लंबी है प्रमुख रूप से पिछले चुनाव में कवासी लखमा को टक्कर दे चुके धनीराम बारसे भी दावेदार हैं..तो वहीं स्वयं मुक्का भी विधायक की टिकट की लाइन में हैं…कोटा नगर पंचायत की अध्यक्ष रही ,मौसम मुत्ति भी दावेदार मानी जा रही हैं…हालांकि कांग्रेस में लगातार जीत दर्ज करने वाले कवासी लखमा के अलावा कोई विकल्प दिखाई नहीं देता उप नेता प्रतिपक्ष होने के साथ पार्टी में मजबूत छवि और बस्तर के कद्दावर नेता के लिहाज से भी कवासी लखमा एक मात्र कांग्रेस के दावेदार सीट पर होंगे ये तय माना जा रहा है ।
कोंटा विधानसभा के मुद्दों और समस्याओं की बात करें तो सबसे बड़ी समस्या नक्सलवाद और पिछड़ापन है। बुनियादी सुविधाओं तक से ज्यादातर आबादी अछूती है। स्वास्थ्य, सड़क, जैसी सुविधाएं आज भी कई गांवों तक पहुंच ही नहीं पाई हैं
जिला सुकमा देश के सबसे पिछड़े जिलों में शुमार है और कोंटा विधानसभा सीट भी इसी जिले में आती है।सबसे बड़ी अगर कोई समस्या है तो वो नक्सलवाद और पिछड़ापन। विकास यहां का सबसे बड़ा मुद्दा है, जिले की आधी आबादी ऐसी है, जहां प्रशासन की सीधी पहुंच नहीं, ऐसे में सरकारी योजनाओं का फायदा लोगों तक पहुंच ही नहीं पाता।
नक्सलवाद का खात्मा भ्रष्टाचार और सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना यहां के सबसे अहम मुद्दे हैं, NH-30 का दशकों से निर्माण नहीं किया जा सका है, जिससे बारिश के दौरान करीब सुकमा जिले का अधिकांश हिस्सा सड़क संपर्क से लगभग कटा रहता है..आंगनबाड़ियां, पीडीएस दुकानें, पेंशन और अन्य सरकारी योजनाऐं अंदरूनी इलाकों में ठीक तरह से संचालित ही नहीं हो पाती ।
कोंटा विधानसभा का बड़ा मुद्दा पोलावरम बांध भी है, जोकि सीमांध्र में बनना है, पर इसके प्रभाव में सुकमा जिले के 17 गांव आ रहे हैं… इन गांव के लोग संशय में हैं, कि आखिर उनका भविष्य क्या होगा?
वेब डेस्क, IBC24