रायपुर। लोगों से अतिरिक्त पैसे लेकर तय समय सीमा के भीतर नागरिक सुविधा प्रदान करने के लिए शासन ने लोक सेवा गारंटी केंद्र तो शुरू किया, लेकिन अधिकारी-कर्मचारियों ने मिलकर इसे भी भ्रष्टाचार और मनमानी का केंद्र बना दिया है। लोगों को तय समय में प्रमाण पत्र या दस्तावेज नहीं बन रहे हैं। और तो और, हर आवेदन की स्थिति पर नजर रखने के लिए तैयार किए गए सॉफ्टवेयर में गोलमाल कर दिया गया है। जिसके चलते आवेदक को तय समय के भीतर काम पूरा हो जाने का मैसेज भेजकर आवेदन क्लोज कर दिया जाता है, जबकि असल में उसका काम हुआ ही नहीं रहता है।
पढ़ें- ‘बोधघाट’ पर वार-पलटवार ! प्रोजेक्ट का विरोध क्यों?
ये तस्वीर है छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में खोले गए लोक सेवा गारंटी केंद्र की, जहां आए दिन इसी तरह आम लोगों की भीड़ उमड़ती है। जन्म हो या जाति, आय हो जमीन का नकल प्रमाण पत्र, करीब 83 तरह की नागरिक सुविधाएं यहां से ऑनलाइन मुहैया कराई जाती है। लोगों को तय समय के भीतर ये सुविधाएं जल्दी से जल्दी मिल सकें, इसके लिए लोगों को अतिरिक्त पैसे देकर रशीद कटवानी होती है। लेकिन अतिरिक्त पैसे देकर भी आम लोगों को ये सुविधा नसीब नहीं हो रही है।
पढ़ें- सीएम हाउस में ‘एट होम विथ सीएम’ का आयोजन, गणतंत्र दिवस परेड में शाम.
राजस्व नकल के आवेदन के अधिकांश मामलों में यही हो रहा है। ऐसे ही एक आवेदक और वकील दुर्गा प्रसाद भी लोकसेवा गांरटी केंद्र के बाहर ही मिल गए। इन्होंने बताया कि 22 जनवरी को राजस्व नकल का आवेदन लगाया था. लोक सेवा गारंटी अधिकार के तहत 9 फरवरी तक बन जाना था। 9 तारीख को ही इनके फोन पर मैसेज आया कि उनका आवेदन स्वीकृत हो चुका है, और नकल तैयार है। लिहाजा, उनका केस क्लोज किया जाता है। लेकिन 10 फरवरी को जब ये नकल लेने संबंधित शाखा पहुंचे तो पता चला नकल बनना तो दूर, उसका रिकॉर्ड ही अब तक राजस्व विभाग से नहीं आया है।
पढ़ें- बस्तर के विकास का नया अध्याय लिखेगी बोधघाट सिंचाई परियोजना- सीएम भू..
राजस्व नकल सेवा के अधिकांश मामलों की यही कहानी है। सॉफ्टवेयर में तो मामला क्लीयर दिखा दिया जाता है, लेकिन असल में लोगों का काम नहीं होता। इससे ऑनलाइन सर्विलांस सिस्टम की विश्वसनीयता ही सवालों के घेरे में है। साफ है कि सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ की गई है। यूं तो हर सप्ताह इसकी समीक्षा भी की जाती है, लेकिन उस बैठक में भी कलेक्टर और दूसरे अधिकारियों को ऑनलाइन स्टेटस की रिपोर्ट दिखा कर शानदार परफॉर्मेंस क्लेम कर ली जाती है, जबकि असलियत कुछ और होती है। लोक सेवा गारंटी केंद्र की अधिकारी इस गलती को स्वीकार तो कर रही है, लेकिन इसके लिए आवदेन की बड़ी संख्या को वजह बताती हैं।
पढ़ें- 12 फरवरी से पटरी पर फिर दौड़ेंगी लोकल ट्रेनें, रेलवे ने जारी किया आ…
जनवरी से लेकर अब तक रायपुर लोक सेवा केंद्र में 16 हजार से ज्यादा आवेदन आए थे, जिनमें से करीब 23 फीसदी आवेदन अभी भी पेंडिंग हैं। पर सवाल ये है कि सरकारी सिस्टम में बाबू और अफसरों की मनमानी पर काबू पाने के लिए ही ऑनलाइन का विकल्प ढूंढा गया था, लेकिन जब सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर मनचाही परफॉर्मेंस दिखा दी जाए, तो फिर सिस्टम पर सवाल खड़ा होना लाजिमी है।