साल भर तक पहले उसकी आबरु लूटता रहा फिर पेट में बच्चा रुकने के बाद गर्भपात कराने की धमकी मिलने के बाद जब महिला ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई तो वहां भी अपनी पहंुच दिखाकर एक महिला पुलिसकर्मी के सहयोग से उसे दबाने की कोशिश की गई। अब पिछले एक साल से गोद में बिना बाप का बच्चा लेकर पीडिता न्याय के लिए दर दर भटक रही है। राज्य महिला आयोग के संज्ञान में आने के बाद मामले का खुलासा हुआ,महिला आयोग की टीम आरोपियों पर जांच कर कडी कार्रवाई कराने की बात कर रही हैे,वहीं पुलिस विभाग के अधिकारी मामले में पूरी कार्रवाई होने की बात कर रहे हैं।
10 महिने के मासूम बच्चे को गोद मे लेकर दर दर भटकती यह वो पीड़ित महिला है जिसे गांव के एक दबंग ने शादी का झांसा देकर पहले साल भर तक उसे अपने हवस का शिकार बनाया फिर पेट में बच्चा रुकने के बाद उसे प्रताडना देना शुरु कर दिया। दिल को झंझोर देने वाला ये मामला है बलरामपुर जिले के ग्राम त्रिकुण्डा का। जहां गिरजा नाम के आरोपी ने 11-8-2014 से 20-9-2015 तक पीडीता सुरजा बाई के घर जाकर उसे शादी का झांसा देकर उसकी आबरु लूटी। पीड़िता को इस दौरान एक बच्चा रुक गया। अब आरोपी उसे गर्भपात कराने की धमकी देता रहा और पीडिता के ऐसा नहीं करने उसे मारने की भी धमकी देता रहा। पीडिता ने थोडी हिम्मत की और मामले की शिकायत त्रिकुण्डा थाने में दर्ज कराई लेकिन उसे वहां भी राहत नहीं मिली।
पीडिता को उसका पिता साथ मे लेकर न्याय के लिए दर दर भटक रहा है। सारे दरवाजे बंद होने के बाद उसने राज्य महिला आयोग के पास इसकी शिकायत की। पीडिता के पिता ने बताया की जब उसकी बेटी गर्भ से थी तब उसने आरोपी को शादी करने को कहा और बेटी को उसके घर छोड दिया। लेकिन दो दिन तक पीडिता को साथ रखने के बाद आरोपी ने उसे घर से निकाल दिया। इस दौरान पीडिता को एक बच्ची भी पैदा हो गई, अब लाचार पिता अपने बदनसीब बेटी और उसके बिना बाप के नाम के बच्चे को लेकर न्याय के लिए दर दर भटक रहा है। वहीं आरोपी ने अब दूसरा विवाह भी कर लिया है।
राज्य महिला आयोग की टीम ने पीडिता की दिल दहला देने वाली जब ये कहानी सुनी तो राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सिस्टम के लचर व्यवस्था को देखकर नाराज हुईं। हर्षिता पाण्डेय ने मीडीया को बताया की पीडिता के साथ न सिर्फ दैहिक शोषण हुआ हैे बल्कि थाने की एक महिला आरक्षक ने पैसे लेकर केस को प्रभावित करने का प्रयास भी किया। राज्य महिला आयोग की टीम ने पीडिता को न्याय दिलाने के लिए प्रयास तो शुरु कर दिया है, साथ ही महिला आरक्षक पर लगे आरोपों की सत्यता की जांच के लिए भी उच्च अधिकारियों को प्रतिवेदन भेजने के साथ ही सत्यता पाए जाने पर ठोस कार्रवाई कराने की बात कही है।
वहीं मामले में पुलिस का अलग ही बयान है,थाना ्रपभारी की मानें तो महिला की रिपोर्ट पर आरोपी के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया गया था,साथ ही उसका चालान भी पेस कर दिया है, वहीं महिला आरक्षक के पैसे लेने के मामले को थाना प्रभारी निराधार बता रहे हैं। उन्होने बताया की उक्त महिला आरक्षक ने सिर्फ पीडिता का मेडिकल कराया था। पुलिस अधिकारी मामले में पूरी कार्रवाई कर देने की बात कर रहे हैं।
मामले में एक ओर जहां पुलिस पूरी कार्रवाई करने की बात कर रही है,लेकिन पीडीता और उसके गोद में ये बच्ची गवाह हैं उसे घिनौने जुर्म के जो उस एक साल में हुआ है।बहरहाल अब देखना होगा की पीडिता को न्याय कब तक मिलेगा।