(IPO News/ Image Credit: IBC24 News)
IPO News: शेयर बाजार की कमजोर स्थिति का असर प्राइमरी मार्केट पर भी दिखाई दे रहा है। इस साल Jio प्लेटफॉर्म्स, फ्लिपकार्ट, SBI फंड्स मैनेजमेंट जैसी बड़ी कंपनियों के IPO आने वाले हैं। ये कंपनियां मिलाकर लगभग 70,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना में हैं। लेकिन ईरान-इजरायल युद्ध और वैश्विक बाजार में अस्थिरता के कारण इन IPO में देरी की संभावना बढ़ गई है। इस साल प्राइमरी मार्केट में सुस्ती भी देखी जा रही है, क्योंकि पहली तिमाही में कुल 16,000 करोड़ रुपये का आईपीओ आया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 19,000 करोड़ रुपये था।
इस साल लिस्टिंग भी कमजोर रही है। अब तक आए 9 मेनबोर्ड IPO में से 7 की निगेटिव लिस्टिंग हुई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान-इजरायल युद्ध और वैश्विक बाजार में हलचल ने कंपनियों को आईपीओ की टाइमलाइन पर फिर से सोचने के लिए मजबूर किया है। उदाहरण के तौर पर PhonePe ने अपने IPO को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। निवेशक अब कंपनियों पर वैल्यूएशन को कम करने का दबाव भी बना रहे हैं, ताकि IPO निवेशक के लिए आकर्षक बने।
टेलीकॉम कंपनी Jio प्लेटफॉर्म्स भी IPO की तैयारी में जुटी है। कंपनी कई बैंकों के साथ संभावित आईपीओ पर चर्चा कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, Jio का IPO 170 बिलियन डॉलर के वैल्यूएशन पर हो सकता है। इस आधार पर कंपनी सार्वजनिक शेयर बिक्री (OFS) के जरिए करीब 40,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है। वहीं, ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart का 2024 का वैल्यूएशन 37 बिलियन डॉलर था और इसमें अल्फाबेट का निवेश भी शामिल है। SBI फंड्स मैनेजमेंट का IPO 1.2 बिलियन डॉलर जुटाने की संभावना है।
हालांकि, मौजूदा मार्केट सेंटीमेंट लंबे समय तक बना रहता है तो अन्य बड़ी कंपनियां भी PhonePe की तरह अपने आईपीओ की लॉन्चिंग पर फिर से विचार कर सकती हैं। यह निवेशकों और कंपनियों दोनों के लिए अनिश्चितता पैदा कर रहा है। जेप्टो समेत कई अन्य कंपनियां भी IPO की कतार में हैं, लेकिन वैश्विक अस्थिरता और युद्ध जैसी परिस्थितियां इनके समय पर लाने में बाधा बन सकती हैं।
नोट:- शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है। शेयरों, म्यूचुअल फंड्स और अन्य वित्तीय साधनों की कीमतें बाजार की स्थितियों, आर्थिक परिस्थितियों और अन्य कारकों के आधार पर घट-बढ़ सकती हैं। इसमें पूंजी हानि की संभावना भी शामिल है। इस जानकारी का उद्देश्य केवल सामान्य जागरूकता बढ़ाना है और इसे निवेश या वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।