(Military-Grade Encryption/ Image Credit: Pixabay)
Military-Grade Encryption: आज के समय में डेटा प्राइवेसी हर व्यक्ति की बड़ी जरूरत बन चुकी है। इंटरनेट और स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ लोगों की निजी जानकारी भी ऑनलाइन स्टोर होने लगी है। इसी वजह से साइबर फ्रॉड और डेटा चोरी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बैंकिंग डिटेल्स से लेकर चैट और फोटो तक हर चीज को सुरक्षित रखना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। इसलिए क्लाउड स्टोरेज, मैसेजिंग ऐप्स और ऑनलाइन सेवाएं सुरक्षा के लिए अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल करती है। जिनमें Military-Grade Encryption शब्द अक्सर देखने को मिलता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Military-Grade Encryption एक मजबूत डेटा सुरक्षा तकनीक है। जिसका उपयोग जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि इसे सिर्फ सेना (military) में ही इस्तेमाल किया जाता है। यह शब्द ज्यादातर मार्केटिंग के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है ताकि यूजर्स को लगे कि उनकी जानकारी बहुत सुरक्षित है। असल में यह एक एडवांस एन्क्रिप्शन सिस्टम होता है जो डेटा को बेहद सुरक्षित तरीके से लॉक कर देता है।
यह एन्क्रिप्शन तकनीक किसी भी डेटा को एक खास कोड में बदल देती है जिसे बिना सही ‘डिक्रिप्शन की’ के पढ़ा नहीं जा सकता। डेटा को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़कर जटिल कोड में बदल दिया जाता है। अगर कोई हैकर इसे चुराने की कोशिश भी करे तो उसे वह जानकारी समझ नहीं आएगी। यहां तक कि अगर डेटा मिल भी जाए तब भी उसे डिकोड करना लगभग नामुमकिन होता है। जिससे यूजर की जानकारी सुरक्षित रहती है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक बेहद मजबूत एन्क्रिप्शन तकनीक मानी जाती है और अब तक इसे तोड़ना बहुत मुश्किल साबित हुआ है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में आने वाले क्वांटम कंप्यूटर भी इसे आसानी से क्रैक नहीं कर पाएंगे। हालांकि, पूरी सुरक्षा सिर्फ एन्क्रिप्शन पर निर्भर नहीं करती। अगर पासवर्ड कमजोर हो, सिस्टम में कोई खामी हो या अन्य सुरक्षा स्तर कमजोर हो तो डेटा खतरे में पड़ सकता है।