उप्र में बिहार का प्रयोग तभी संभव है जब नेता परिपक्वता दिखाएं: शिवपाल

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उप्र में बिहार का प्रयोग तभी संभव है जब नेता परिपक्वता दिखाएं: शिवपाल

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  • Publish Date - August 12, 2022 / 07:32 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 07:46 PM IST

इटावा (उप्र), 12 अगस्त (भाषा) प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने शुक्रवार को कहा कि जिस तरह बिहार में प्रमुख विपक्षी दल जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) भाजपा के खिलाफ अपने मतभेदों को दरकिनार कर साथ आएं हैं, वैसा उत्तर प्रदेश में तभी संभव है जब यहां के नेता बिहार की तरह परिपक्वता दिखाएं।

देश में अगले लोकसभा चुनाव में 2024 में नरेंद्र मोदी के खिलाफ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विपक्षी चेहरे के रूप में उभरने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर, शिवपाल ने कोई साफ जवाब नहीं दिया।

वरिष्ठ समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई शिवपाल ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘वह (नीतीश) आठवीं बार (बिहार के) मुख्यमंत्री बने हैं। वह वरिष्ठ हैं और इसके साथ ही वह एक पुराने समाजवादी हैं।’

उन्होंने कहा, ‘पहले नेताओं में परिपक्वता होनी चाहिए। जब तक उनमें परिपक्वता नहीं होगी, तब तक उत्तर प्रदेश में कुछ नहीं हो सकता। बिहार के नेताओं ने परिपक्वता दिखाई और इसलिए सब कुछ हुआ।’ हालांकि उन्होंने किसी पार्टी या व्यक्ति का नाम नहीं लिया।यादव यहां रक्षाबंधन के मौके पर थे।

हाल ही में, शिवपाल यादव ने उत्तर प्रदेश में अपने विपक्षी गठबंधन सहयोगियों को संभालने में राजनीतिक परिपक्वता नहीं दिखाने के लिए अपने भतीजे समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर हमला बोला था।

शिवपाल यादव ने हाल ही में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर जसवंतनगर से जीत हासिल की थी और चुनाव परिणाम आने के बाद से ही उनकी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच दूरियां बढ़ती गई। अब शिवपाल यादव ने अपनी पार्टी के संगठन को मजबूत करना शुरू किया है।

यह पूछे जाने पर कि क्या वह अगले लोकसभा चुनाव से पहले बिहार की तरह उप्र में राजनीतिक दलों के बीच एकता बनाने की पहल करेंगे, उन्होंने कहा कि इसके लिए अभी समय है। उन्होंने कहा, ‘हम एक छोटी पार्टी हैं और फिलहाल हम अपने संगठन को मजबूत कर रहे हैं।’

जद (यू) नेता नीतीश कुमार ने बुधवार को रिकॉर्ड आठवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। हालांकि सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में नीतीश कुमार और उनकी पार्टी का कोई प्रभाव नहीं है, लेकिन राजद के साथ उनके हाथ मिलाने से यहां के नेताओं को अगले आम चुनाव में शक्तिशाली भाजपा का मुकाबला करने के लिए इसी तर्ज पर सोचने के लिए प्रेरित किया है।

भाषा सं आनन्द राजकुमार

राजकुमार