लखनऊ, 10 जनवरी (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की ‘विश्वसनीयता’ पर सवाल उठाते हुए शनिवार को दावा किया कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले ही पता था कि कितने मतदाताओं को इससे हटाया जाएगा
यादव ने लखनऊ में संवाददाताओं से कहा कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किया गया और बूथ स्तर के एजेंट (बीएलए) समेत सभी राजनीतिक दलों ने बिना किसी आपत्ति के इस प्रक्रिया में भाग लिया।
मंगलवार को मसौदा मतदाता सूची जारी होने के बाद यादव ने कहा कि उन्हें तीन करोड़ मतदाताओं के हटाए जाने की आशंका थी लेकिन ‘‘मसौदा मतदाता सूची जारी होने से पहले ही (जब किसी को यह पता नहीं था कि कितने मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाएंगे) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा था कि लगभग चार करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाएंगे।’’
यादव ने कहा कि कन्नौज के एक पूर्व सांसद ने भी कहा था कि एक जिले में पहले ही तीन लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं।
यादव ने कहा कि अगर भाजपा नेता ऐसे बयान दे रहे हैं, तो निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने बताया था कि एसआईआर के बाद मंगलवार को उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशित किया गया, जिसमें पहले सूचीबद्ध 15.44 करोड़ मतदाताओं में से 2.89 करोड़ मतदाताओं को हटा दिया गया और 12.55 करोड़ मतदाताओं को बरकरार रखा गया।
रिणवा ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मृत्यु, स्थायी प्रवास या एकाधिक पंजीकरण के कारण 2.89 करोड़ मतदाताओं, यानी 18.70 प्रतिशत, को मसौदा सूची में शामिल नहीं किया जा सका। रिणवा ने कहा था कि अंतिम मतदाता सूची इस साल छह मार्च को प्रकाशित की जाएगी।
यादव ने कहा कि हमें उम्मीद है कि जब मतदाता पंजीकरण अभियान जैसे इतने बड़े पैमाने पर अभियान चलाए जा रहे हैं, तो वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे।
यादव ने बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पंचायत चुनाव के ग्रामीण मतदाताओं की कुल संख्या 12.69 करोड़, पूरे राज्य में विधानसभा चुनाव में वोट देने के लिए पात्र मतदाताओं की संख्या 12.56 करोड़ से अधिक कैसे हो सकती है, जबकि वही बीएलओ दोनों चुनावों के लिए मतदाता सूचियां तैयार कर रहे हैं।
यादव ने विधानसभा चुनाव से संबंधित मसौदा मतदाता सूची से 2.88 करोड़ मतदाताओं को हटाए जाने और पंचायत चुनावों के लिए उन्हीं बीएलओ द्वारा 40 लाख मतदाताओं को जोड़े जाने पर संदेह जताया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘क्या पंचायत चुनावों की अंतिम मतदाता सूची को 50 दिनों तक जानबूझकर इस तथ्य को छिपाने के लिए विलंबित किया जा रहा है? जब दोनों मतदाता सूचियां समान बीएलओ द्वारा तैयार की गई हैं, तो राज्य के आंकड़े क्यों जारी नहीं किए जा रहे हैं? वे इसमें देरी क्यों कर रहे हैं?’’
सपा प्रमुख ने कहा, ‘‘हम केवल निर्वाचन आयोग से ही इस जानकारी की मांग कर सकते हैं, क्योंकि सत्ता में बैठे लोगों ने पहले ही वोट संख्या बढ़ाने के निर्देश दे दिए हैं।’’
समाजवादी पार्टी के प्रमुख ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को शिकायतों का मसौदा उपलब्ध करा दिया गया है, जिसे वे फर्जी मतदान का पता चलने पर अधिकारियों के पास दर्ज करा सकते हैं।
यादव ने कहा, ‘‘एक प्रारूप भी तैयार कर लिया गया है और अपने कार्यकर्ताओं को हम प्रारूप दे देंगे। कहीं उन्हें फर्जी वोट बनता हुआ नजर आए या इसकी जानकारी मिले तो बस उन्हें नाम डालना है।
मतदाताओं की जानकारी को आधार कार्ड से जोड़ने की मांग करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पास ऐसी मशीन हैं जिनका इस्तेमाल वे फर्जी आधार कार्ड बनाने के लिए करते हैं।
सपा प्रमुख ने कहा कि पहले दिन से समाजवादी पार्टी कह रही है कि मतदाता सूची की यह प्रक्रिया एसआईआर नहीं एनआरसी है।
उन्होंने कहा, ‘‘जो काम गृह मंत्रालय का था, भाजपा सरकार उसे निर्वाचन आयोग से करा रही है। सरकार बताए कि एसआईआर में कितने घुसपैठिए निकले। सरकार घुसपैठियों की सूची दे।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार साजिश और षड्यंत्र के तहत पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज का वोट काटने और अपना वोट बढ़ाने का निर्देश दे रही है।
भाषा आनन्द सिम्मी
सिम्मी