भाजपा उप्र विधानसभा की 225 सीटों पर बदल सकती है उम्मीदवार : अखिलेश यादव

भाजपा उप्र विधानसभा की 225 सीटों पर बदल सकती है उम्मीदवार : अखिलेश यादव

भाजपा उप्र विधानसभा की 225 सीटों पर बदल सकती है उम्मीदवार : अखिलेश यादव
Modified Date: June 9, 2026 / 09:34 pm IST
Published Date: June 9, 2026 9:34 pm IST

लखनऊ, नौ जून (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में लगभग 225 सीट पर अपने उम्मीदवार बदल सकती है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद भाजपा उम्मीदवारों को बदलने पर विचार कर रही है।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा प्रयागराज की सभी विधानसभा सीट पर अपने उम्मीदवार बदलने की योजना बना रही है और यही फॉर्मूला उन 43 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में भी अपनाएगी जहां ‘इंडिया’ गठबंधन ने जीत दर्ज की थी।

यादव ने कहा कि भाजपा साथ ही उन सीटों पर भी यह रणनीति अपना सकती है जहां उनके मुताबिक सत्तारूढ़ दल ने हेरफेर करके जीत हासिल की थी।

यहां जारी एक बयान में यादव ने कहा, ‘‘खबरों से पता चलता है कि भाजपा प्रयागराज की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार बदलने जा रही है क्योंकि पार्टी को लगता है कि ये विधायक और उम्मीदवार केवल पैसा बनाने में व्यस्त थे और इसी वजह से लोकसभा सीट उनके हाथ से निकल गई।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘यही फॉर्मूला उत्तर प्रदेश की उन सभी 43 लोकसभा सीटों पर लागू किया जा रहा है जहां ‘इंडिया’ गठबंधन जीता था और उन 9-10 सीटों पर भी जहां भाजपा वोटों से नहीं बल्कि प्रमाणपत्रों में हेरफेर करके जीती थी। इसका मतलब है कि लगभग 225 सीटों पर उम्मीदवार बदले जाएंगे।’’

सपा प्रमुख ने यह भी दावा किया कि भाजपा विधायक खुद अगला चुनाव लड़ने से ‘हिचकिचा’ रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सामाजिक गठबंधन के खिलाफ उनके जीतने की संभावना बहुत कम है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था की समस्याएं, महंगाई, बेरोजगारी, कथित प्रश्नपत्र लीक, आरक्षण से जुड़ी चिंताएं, पीडीए समुदायों के खिलाफ अत्याचार और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध जैसे मुद्दों के कारण भाजपा नेताओं का जनसमर्थन खत्म हो गया है।

यादव ने दावा किया कि भाजपा के ‘‘मौजूदा विधायकों को लोगों का गुस्सा समझ आ गया है’’ और राज्य सरकार की नीतियों के कारण जनता की नाराजगी चरम पर पहुंच गई है।

भाषा आनन्‍द धीरज

धीरज


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