लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में भ्रष्टाचार के आरोपों पर उच्च न्यायालय ने मांगा जवाब

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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में भ्रष्टाचार के आरोपों पर उच्च न्यायालय ने मांगा जवाब

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  • Publish Date - August 14, 2026 / 11:41 PM IST,
    Updated On - August 14, 2026 / 11:41 PM IST

लखनऊ, 14 अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के शुरू होने के महज 26 दिनों के भीतर 74 स्थानों पर गड्ढे बनने और सड़क क्षतिग्रस्त होने के आरोपों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।

पीठ ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और प्रदेश के परिवहन विभाग को याचिका में लगाए गए आरोपों पर बिंदुवार जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने एक जनहित याचिका पर पारित किया।

याचिका में कहा गया है कि करीब 4700 करोड़ रुपये की लागत से बने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के चालू होने के 26 दिनों के भीतर ही 74 अलग-अलग स्थानों पर गड्ढे बन गए या सड़क टूट गई।

याची ने एक्सप्रेसवे के निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए इसकी स्वतंत्र जांच की मांग की है।

याचिका में उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने अथवा सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

याचिका में एक्सप्रेसवे पर वसूले जा रहे टोल टैक्स की दरों को भी अत्यधिक बताते हुए इन्हें कम करने की मांग की गई है।

याची का कहना है कि सड़क की गुणवत्ता और टोल की दरों से जुड़े इन मुद्दों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है। पीठ ने सभी संबंधित पक्षों से याचिका में उठाए गए आरोपों और मांगों पर बिंदुवार जवाब मांगा है।

भाषा सं आनन्द संतोष

संतोष