नकली दवाओं की आपूर्ति करने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़; छह मुकदमे दर्ज
नकली दवाओं की आपूर्ति करने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़; छह मुकदमे दर्ज
लखनऊ, 30 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नकली और घटिया दवाओं के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत, खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने नकली बिल, क्रॉस-बिलिंग और नकली बैंक लेन-देन के जरिए बाजार में नकली दवाओं की आपूर्ति करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि इस मामले में लखनऊ के अमीनाबाद थाने में छह मुकदमे दर्ज किये गये हैं।
एफएसडीए ने नकली दवाओं की आपूर्ति को रोकने के लिए इस महीने एक बड़ा अभियान शुरू किया है।
विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई सिर्फ दवाएं जब्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद इस गिरोह के पीछे के पूरे नेटवर्क को खत्म करना है।
एफएसडीए की आयुक्त डॉक्टर रोशन जैकब ने बताया कि जांच में पता चला कि मिश्रा एसोसिएट्स (अमीनाबाद), मिश्रा मेडिकल एजेंसी (बछरावां, रायबरेली), श्री अशोक फार्मास्यूटिकल्स (अमीनाबाद), भारत फार्मा और एमडीएच फार्मा बिना किसी वास्तविक दवा आपूर्ति के केवल कागज़ों पर ‘क्रॉस-बिलिंग’ कर रही थीं।
उन्होंने बताया कि नकली दवाओं को असली दिखाने की कोशिश में बिना किसी बैंक अंतरण के नकली लेन-देन दिखाए जा रहे थे।
जैकब ने बताया कि इन जानकारियों के आधार पर मनीष मिश्रा, आमोद कुमार मिश्रा, सनी कश्यप, देवेंद्र शुक्ला और राहुल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अमीनाबाद थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा यह हुआ कि भारत फार्मा और एमडीएच फार्मा के नाम से दिखाई गई फर्म, जिनके जरिए करोड़ों रुपये की दवाओं की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड दिखाया गया था, उनकी दवाओं का कोई वास्तविक भंडार नहीं था। संबंधित मालिकों – अमरीन अहसान और मंताशा ने लिखित बयान दिए कि उनकी फर्म उनकी जानकारी के बिना देवेंद्र शुक्ला द्वारा चलाई जा रही थीं।’’
जैकब ने बताया कि जब एफएसडीए अधिकारियों ने जाकर भौतिक सत्यापन किया तो कोई दवा भंडार नहीं मिला, जिससे नकली बिलिंग के जरिए नकली दवाओं के कारोबार की पुष्टि हुई।
उन्होंने कहा कि इन फर्म के निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि वे इन दवाओं के लिए खरीद के बिल पेश करने में विफल रहीं, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि वे नकली बिलों के जरिए नकली दवाओं की आपूर्ति कर रही थीं।
जैकब ने बताया कि जांच में यह भी पता चला कि दवा की कीमत उनकी असल लागत की लगभग आधी ही थी जिससे जांच एजेंसियों का यह शक और पक्का हो गया कि बाजार में नकली दवाओं की आपूर्ति की जा रही थी।
इस अभियान में एफएसडीए के साथ-साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन ने भी अहम भूमिका निभाई।
जैकब ने बताया कि विभाग ने सभी जिलों के ड्रग निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे संदिग्ध थोक दवा व्यापारियों, एजेंटों और सप्लाई चेन पर लगातार नजर रखें, नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लाइसेंस रद्द करें और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
भाषा सलीम शफीक
शफीक

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