जन्‍म प्रमाणपत्र बनवाने में परेशानी को लेकर समाजवादी पार्टी का सदन से बहिर्गमन

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जन्‍म प्रमाणपत्र बनवाने में परेशानी को लेकर समाजवादी पार्टी का सदन से बहिर्गमन

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  • Publish Date - February 17, 2026 / 06:04 PM IST,
    Updated On - February 17, 2026 / 06:04 PM IST

लखनऊ, 17 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के सातवें दिन मंगलवार को विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्यों ने जन्‍म प्रमाण पत्र बनवाने में आम जनता को होने वाली असुविधाओं के मसले पर सदन से बहिर्गमन किया।

विधानसभा में कार्यस्थगन नियम-56 (विधानसभा की कार्यवाही रोककर चर्चा कराये जाने की मांग) के तहत सपा के वरिष्ठ सदस्य मनोज कुमार पारस ने यह मामला उठाया।

पारस ने कहा कि आय प्रमाण पत्र के अभाव में बहुत सारी योजनाओं में प्रदेश के लोग आवेदन नहीं कर पाते हैं। उन्होंने इसके लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया और यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेता फार्म-7 भरवा कर वोट कटवाने का काम कर रहे हैं।

सपा सदस्य कमाल अख्तर ने ग्राह्यता पर बल देते हुए कहा कि बहुत सारे नगर पालिका और नगर पंचायतें ऐसी हैं, जो नई बनी हैं और वहां परिवार रजिस्टर नहीं है और लोग जब अपना जन्म प्रमाण पत्र लेने जाते हैं तो उन्हें प्रमाण पत्र नहीं दिया जा रहा है।

अख्तर ने सरकार से जन्‍म प्रमाण पत्र बनाने के संबंध में अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की।

संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्‍ना ने बताया कि पारस बिजनौर जिले और कमाल अख्‍तर मुरादाबाद जिले के विधायक हैं, लेकिन वह सिद्धार्थनगर जिले की बांसी का मामला उठा रहे हैं।

इस पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जो विधायक सदन में चुनकर आते हैं उन्हें पूरा अधिकार है कि वह उत्तर प्रदेश के किसी भी क्षेत्र का मुद्दा उठाएं।

माता प्रसाद ने यह भी कहा, ‘‘हमारे एसडीएम ने खुद कहा कि जन्म प्रमाण पत्र बनाने की मनाही है, हम नहीं बनाएंगे।’’

संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि कहीं भी कोई असुविधा नहीं है। यह मामला दिसंबर में भी उठाया गया था और संतोषजनक जवाब दिया गया था।

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि यह मामला नियम-56 के तहत नहीं आता है, इसलिए यह सूचना अग्राह्य की जाती है।

हालांकि सपा सदस्य डॉक्टर रागिनी सोनकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सरकार के जवाब से सदस्य संतुष्ट नहीं हुए और सदन से बहिर्गमन किया।

भाषा आनन्द शफीक

शफीक