उप्र : कुष्ठ रोगियों के खिलाफ भेदभाव को समाप्त करने के लिए विधानसभा में दो विधेयक पेश

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उप्र : कुष्ठ रोगियों के खिलाफ भेदभाव को समाप्त करने के लिए विधानसभा में दो विधेयक पेश

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  • Publish Date - February 16, 2026 / 10:36 PM IST,
    Updated On - February 16, 2026 / 10:36 PM IST

लखनऊ, 16 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को कुष्ठ रोगियों के खिलाफ भेदभाव को समाप्त करने और उन्‍हें समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए निकाय नियमावलियों से ”कुष्‍ठाश्रम” शब्द हटाने के लिए दो विधेयक पेश किये गये।

विधानसभा में सरकार की ओर से सोमवार को उप्र नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 और उत्‍तर प्रदेश नगर पालिका (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया गया। इसके तहत अब “कुष्ठाश्रम” शब्द को निकालने का प्रावधान किया गया है।

उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 का अग्रतार संशोधन करने के लिए उप्र नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 और उत्तर प्रदेश नगर पालिका (संशोधन) विधेयक 2026 बनाया गया है।

यह दोनों अधिनियम उप्र नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 और उत्तर प्रदेश नगर पालिका (संशोधन) अधिनियम 2026 कहा जाएगा और यह दिनांक दो फरवरी 2026 से प्रवृत्त हुआ समझ जाएगा। इसके लिए दो फरवरी, 2026 को अध्‍यादेश जारी किया गया था।

इस विधेयक में यह प्रस्ताव किया गया है कि उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 8 उप धारा (एक) के खंड (ख) में शब्द और प्रतीक ‘कुष्ठाश्रम’ निकाल दिए जाएंगे।

उप्र सरकार ने इस संशोधन के उद्देश्य और कारण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय ने याचिकाओं की सुनवाई करते हुए सात मई 2025 के माध्यम से राज्यों को कुष्ठ रोग से प्रभावित या ठीक हुए व्यक्तियों के विरुद्ध विभेद करने वाली या उनके प्रति अनादर सूचक विधियों को परिलक्षित करने हेतु एक समिति गठित करने के लिए निर्देश जारी किया।

शीर्ष अदालत ने उनसे ऐसे विभेदकारी उपबंधों को हटाने के लिए अति आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा है।

उन्होंने कहा की चूंकि राज्य विधानमंडल सत्र में नहीं था और पूर्वोक्त विनिश्चय को कार्यान्वित करने के लिए तुरंत विधायी कार्रवाई आवश्यक थी, इसलिए राज्यपाल द्वारा दो फरवरी 2026 को उत्तर प्रदेश नगर पालिका (संशोधन) अध्यादेश 2026 प्रख्यापित किया गया।

सदन में सोमवार को उप्र नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 और उत्तर प्रदेश नगर पालिका (संशोधन) अधिनियम 2026 विधेयक पूर्व अध्यादेश को प्रतिस्थापित करने के लिए पेश किया गया है। इसके आगे पारित कराये जाने की संभावना है।

भाषा

आनन्द

रवि कांत