गन्ने के बकाया भुगतान पर कम ब्याज के साथ वसूली प्रमाण पत्र पर अदालत गंभीर

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गन्ने के बकाया भुगतान पर कम ब्याज के साथ वसूली प्रमाण पत्र पर अदालत गंभीर

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  • Publish Date - August 5, 2026 / 10:22 PM IST,
    Updated On - August 5, 2026 / 10:22 PM IST

लखनऊ, पांच अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों का बकाया भुगतान में विलंब पर 15 प्रतिशत ब्याज के बजाय 12 प्रतिशत ब्याज के साथ जारी किए जा रहे रिकवरी प्रमाण पत्र को गंभीरता से लिया है।

अदालत ने दो दिसंबर, 2021 के बाद इस तरह का प्रमाण पत्र जारी करने वाले गन्ना आयुक्त से इस संबंध में विवरण मांगा है।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने किसान मजदूर संगठन के संयोजक वीएम सिंह द्वारा 2006 में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

अदालत ने उत्तर प्रदेश गन्ना आयुक्त को उन सभी पूर्व गन्ना आयुक्तों के नामों का विवरण देने को कहा जो दो दिसंबर, 2021 के बाद तैनात रहे और उत्तर प्रदेश गन्ना अधिनियम, 1953 के तहत रिकवरी प्रमाण पत्र जारी किए।

पीठ ने कहा कि 15 प्रतिशत के बजाय 12 प्रतिशत ब्याज वाले रिकवरी प्रमाण पत्र जारी करना प्रथम दृष्टया उच्च न्यायालय के 23 दिसंबर, 2021 के आदेश की अवमानना प्रतीत होता है।

अदालत ने यह भी कहा कि वह इस बात की समीक्षा करेगी कि क्या यह कार्य मिलीभगत कर किया गया या इसका इरादा गन्ना किसानों की कीमत पर चीनी मिलों को वित्तीय लाभ पहुंचाना था।

अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 31 अगस्त निर्धारित की।

भाषा सं राजेंद्र शफीक

शफीक