Prayagraj News: शहीद के सम्मान में अब आर-पार की लड़ाई! SRN का नाम ठाकुर रोशन सिंह अस्पताल करने की मांग, 9वें दिन पहुंचे सैकड़ों चिकित्सक व कर्मचारी

शहीद के सम्मान पर आर-पार की लड़ाई! SRN का नाम ठाकुर रोशन सिंह अस्पताल करने की मांग, Demand to rename SRN as Thakur Roshan Singh Hospital

Prayagraj News: शहीद के सम्मान में अब आर-पार की लड़ाई! SRN का नाम ठाकुर रोशन सिंह अस्पताल करने की मांग, 9वें दिन पहुंचे सैकड़ों चिकित्सक व कर्मचारी
Modified Date: August 13, 2026 / 08:54 pm IST
Published Date: August 13, 2026 6:14 pm IST

प्रयागराज: Prayagraj News: यूपी के प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध मंडलीय चिकित्सालय स्वरूप रानी नेहरू (SRN अस्पताल) का नाम बदलकर ‘अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह’ के नाम पर रखने की मांग को लेकर महुआ डाबर संग्रहालय परिवार के तत्वावधान में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को नौवें दिन भी जारी रहा। आंदोलन को लेकर प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिस स्थान पर ठाकुर रोशन सिंह ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, उसी स्थान की पहचान उनके नाम से होनी चाहिए।

सैकड़ों चिकित्सक-कर्मचारी पहुंचे, शहीद को दी श्रद्धांजलि

Prayagraj News: गुरुवार को अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान स्थल पर मोतीलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज और मंडलीय चिकित्सालय ‘स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल’ के सैकड़ों चिकित्सक और कर्मचारी पहुंचे। सभी ने सिर झुकाकर महान क्रांतिकारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान कहा गया कि ठाकुर रोशन सिंह ने इसी स्थान पर हंसते-हंसते देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।

मलाका जेल में दी गई थी ठाकुर रोशन सिंह को फांसी

गौरतलब है कि इसी मलाका जेल में अंग्रेजी हुकूमत ने काकोरी केस के अमर नायक ठाकुर रोशन सिंह को फांसी दी थी। करीब आठ महीने तक वह फांसीघर के पास स्थित काल कोठरी में कैद रहे। 19 दिसंबर 1927 की सुबह उन्होंने फांसी का फंदा चूमकर देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए और अमर हो गए। धरनारत लोगों का कहना है कि ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान के करीब 20 वर्ष बाद देश आजाद हुआ, लेकिन आजादी के बाद उनके बलिदान स्थल को ही भुला दिया गया।

‘बलिदान स्थल का नाम शहीद के नाम से दुनिया में रोशन होना चाहिए’

महुआ डाबर संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि आगामी 19 दिसंबर से ठाकुर रोशन सिंह का बलिदान शताब्दी वर्ष शुरू हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या हम उस महान बलिदानी परंपरा की कीर्ति की रक्षा नहीं कर सकते, जिसने अपना सर्वोच्च बलिदान देकर देश को स्वतंत्रता की सौगात दिलाई? उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों से जो गलती हुई है, उसे अब तत्काल सुधारा जाना चाहिए। जिस धरती पर शहीद का खून गिरा, उसका नाम शहीद के नाम से दुनिया में रोशन होना चाहिए।

‘नौ दिन से शांतिपूर्ण धरना, फिर भी प्रशासन से ठोस बातचीत नहीं’

डॉ. अवनीश सिंह ने कहा कि पिछले नौ दिनों से शांतिपूर्ण धरना चल रहा है, लेकिन जिला प्रशासन और सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी किसी व्यक्तिगत लाभ की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि बलिदान का सम्मान चाहते हैं। उन्होंने कहा कि गोरखपुर, गोंडा और अयोध्या में यदि शहीदों के नाम पर आयोजन हो सकते हैं, तो प्रयागराज की इस पवित्र माटी को क्यों भुलाया जा रहा है? धरने में प्रमुख रूप से सोनू चौधरी, राबिन सिंह, भूपेश यादव, शिवांग त्रिपाठी, अग्निवेश तिवारी और सूरज सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र, युवा और नागरिक दिनभर मौजूद रहे। आंदोलनकारियों की मांग है कि SRN अस्पताल का नाम बदलकर अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर किया जाए, ताकि जिस स्थान पर महान क्रांतिकारी ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए, उसकी पहचान भी उनके बलिदान से जुड़ सके।

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