2070 तक भारत के शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य के लिए ‘इलेक्ट्रिक मोबिलिटी’ ज़रूरी : एचडी कुमारस्वामी

2070 तक भारत के शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य के लिए 'इलेक्ट्रिक मोबिलिटी' ज़रूरी : एचडी कुमारस्वामी

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  • Publish Date - January 9, 2026 / 09:48 PM IST,
    Updated On - January 9, 2026 / 09:48 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

लखनऊ, नौ जनवरी (भाषा) केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने शुक्रवार को कहा कि 2070 तक ‘नेट-ज़ीरो (शुद्ध शून्य)’ उत्सर्जन हासिल करने की भारत की प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (इलेक्ट्रिक वाहन और उससे जुड़ी व्यवस्था) अत्यंत जरूरी है तथा यह देश के स्वच्छ, टिकाऊ और आत्मनिर्भर परिवहन की ओर बदलाव का एक मुख्य स्तंभ है।

यहां अशोक लेलैंड के इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) निर्माण इकाई के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए, कुमारस्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, भारत ने जलवायु शुद्धता के लिए एक स्पष्ट, महत्वाकांक्षी रोडमैप अपनाया है।

उन्होंने कहा, ‘इलेक्ट्रिक मोबिलिटी 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन हासिल करने के भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को काफी कम करती है, परिवहन क्षेत्र से कार्बन उत्सर्जन में कटौती करती है और यह देश के स्वच्छ, टिकाऊ और आत्मनिर्भर मोबिलिटी की ओर बदलाव का एक मुख्य स्तंभ साबित होगी।”

कुमारस्वामी ने कहा कि उनके मंत्रालय ने भी इस लक्ष्य के अनुरूप कई उपाय किए हैं। उद्घाटन समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अशोक लेलैंड और हिंदुजा समूह के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए।

कुमारस्वामी ने कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भारतीय उद्योगों, नवोन्मेषकों और युवाओं के लिए नए अवसर भी खोलती है, जबकि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को मजबूत करती है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने भारी उद्योग मंत्रालय के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाने के लिए ‘फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स’ योजना समेत कई कदम उठाए हैं। इस योजना का परिव्यय 11,500 करोड़ रुपये है।

केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री ने कहा कि योजना के तहत अब तक 20 लाख से ज़्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियां बेची जा चुकी हैं। मंत्री ने कहा कि घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भी उतनी ही जरूरी है।

भाषा किशोर आनन्द

राजकुमार

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