हाथरस भगदड़ : दो साल बाद भी पीड़ितों की टीस और ‘भोले बाबा’ में भक्तों का विश्वास बरकरार

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हाथरस भगदड़ : दो साल बाद भी पीड़ितों की टीस और 'भोले बाबा' में भक्तों का विश्वास बरकरार

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  • Publish Date - July 1, 2026 / 10:16 PM IST,
    Updated On - July 1, 2026 / 10:16 PM IST

हाथरस (उप्र), एक जुलाई (भाषा) हाथरस के सिकंदराराऊ क्षेत्र में सूरजपाल उर्फ ​​नारायण साकार हरि, उर्फ ‘भोले बाबा’ के सत्संग के बाद श्रद्धालुओं के बीच मची भगदड़ की दुखद घटना में मारे गए 121 श्रद्धालुओं के परिजन का दुख दो साल बाद भी ताजा है।

हालांकि ‘भोले बाबा’ अब सत्संग नहीं करते हैं मगर इसके बावजूद उनके अनुयायियों का उनमें अटूट विश्वास बना हुआ है।

भगदड़ की यह घटना दो जुलाई 2024 को सिकंदराराऊ थाना इलाके में मुगलगढ़ी और फूलराई गांवों के बीच हुई थी। घटना के दिन भोले बाबा के ‘सत्संग’ के लिए खासी भीड़ जमा हुई थी, जिसमें मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल थे।

अधिकारियों के अनुसार सभा में 80 हजार लोगों के आने की बात कहकर प्रशासन से आयोजन की अनुमति मांगी गई थी जबकि मौके पर ढाई लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई थी।

इस मामले में जिला अदालत में मुकदमे की कार्यवाही जारी है और अब तक अभियोजन पक्ष के 30 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि 31वें गवाह का बयान बृहस्पतिवार यानी इस त्रासदी की दूसरी बरसी पर दर्ज किया जाना है।

पुलिस ने घटना के लिए भोले बाबा के मुख्य सेवादार देव प्रकाश मधुकर समेत 11 आरोपियों के खिलाफ 3200 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया था। सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए हैं और मुकदमा अब सुबूत पेश करने के चरण में है।

मामले के सभी 11 आरोपी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। इनमें देव प्रकाश मधुकर, मुकेश कुमार, मेघ सिंह, संजू कुमार, मंजू देवी, राम लदेते, उपेंद्र सिंह यादव, राम प्रकाश शाक्य, दुर्वेश कुमार और बलवीर सिंह शामिल हैं।

बचाव पक्ष के वकील मुन्ना सिंह पुंडीर ने बताया कि मामला अपर जिला न्यायाधीश संगीता शर्मा की अदालत में विचाराधीन है।

हाथरस में भगदड़ कि उस त्रासद घटना में जिले के भी कई लोगों ने अपनी जान गंवाई थी और उनमें से एक परिवार ऐसा भी था जिसने हादसे में तीन पीढ़ियां खो दी थीं।

सोखना गांव के निवासी विनोद कुमार का कहना है कि उन्होंने अपनी मां जयवंती (70), पत्नी राजकुमारी (40) साल और बेटी भूमि (नौ) को सत्संग कांड में खोया है।

उन्होंने कहा, ‘मैं इसलिए जी रहा हूं क्योंकि ज़िंदगी तो चलानी ही है।’

हालांकि फिर भी कुछ अनुयायियों का भोले बाबा पर भरोसा कम नहीं हुआ है।

सोखना गांव के ही राकेश कुमार की 70 वर्षीय बुआ सोन देवी की भगदड़ में मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का भोले बाबा पर भरोसा अब भी अटूट है और वे उनके आश्रम जाते रहते हैं।

गले में भोले बाबा की तस्वीर वाला लॉकेट पहने राकेश ने कहा, ‘भोले बाबा के आशीर्वाद से मेरा परिवार खुशहाल है।’

सोन देवी की बहू रेखा ने बताया कि उनकी सास की मौत के दो महीने बाद उनके पति का भी निधन हो गया। उन्होंने याद किया कि सोन देवी नियमित रूप से भोले बाबा के सत्संग में जाती थीं और परिवार के अन्य सदस्यों को भी इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित करती थीं।

भाषा सं सलीम अमित

अमित