(शिरीष बी प्रधान)
काठमांडू, एक जुलाई (भाषा) नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बुधवार को यहां कहा कि उनका देश ऐतिहासिक समझौते और मानचित्र के आधार पर भारत के साथ सीमा विवाद को कूटनीतिक वार्ता के जरिये सुलझाने के लिए हमेशा तैयार है।
नेपाली संसद के उच्च सदन राष्ट्रीय सभा में सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए खनाल ने यह भी कहा कि विदेश मंत्रालय ने मई में संसद में अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की टिप्पणियों के संबंध में अपनी विस्तृत राय पहले ही सार्वजनिक कर दी है।
खनाल ने कहा कि नेपाल सरकार, नेपाल और भारत के बीच गहरे संबंधों की भावना और संवेदनाओं का सम्मान करते हुए, ऐतिहासिक समझौते और मानचित्र के आधार पर कूटनीतिक वार्ता के जरिये (भारत के साथ) सीमा विवाद सुलझाने के लिए हमेशा तैयार है।
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के 31 मई के इस बयान से विवाद खड़ा हो गया था कि नेपाल ने भी अलग-अलग जगहों पर भारतीय इलाकों पर कब्जा किया है और इस मुद्दे को सुलझाने के लिए हिमालयी देश ने चीन और ब्रिटेन को शामिल किया है।
नयी दिल्ली ने इस विवाद को सुलझाने में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को सिरे से खारिज कर दिया। इस बयान की नेपाल की विपक्षी पार्टियों ने भी आलोचना की।
बाद में, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में इस मामले पर स्पष्टीकरण दिया कि प्रधानमंत्री सीमा के दोनों ओर के लोगों द्वारा एक दूसरे की सीमा के पार कब्जे के बारे में बात कर रहे थे।
बुधवार को सुस्ता सीमा विवाद पर खनाल ने कहा, ‘‘नेपाल और भारत के अलग-अलग सीमावर्ती इलाकों में पहले ही तंत्र बनाए जा चुके हैं और वे सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।’’
उन्होंने स्पष्ट किया, ‘‘अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास जो भी काम हो रहा है, वह दोनों पक्षों के बीच तालमेल से किया जा रहा है।’’
खनाल ने कहा, ‘‘जहां तक (दक्षिणी नेपाल के) सुस्ता इलाके में 132 मीटर लंबे तटबंध के निर्माण की बात है, तो दोनों देशों के अधिकारियों के बीच तालमेल बिठाने के बाद ही काम आगे बढ़ा है।’’
विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘दोनों देशों की संबंधित संस्थाएं एक-दूसरे के लगातार संपर्क में हैं और जरूरी काम कर रही हैं।’’
नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर सीमा का पुराना विवाद है और दोनों देश इन इलाकों पर अपना दावा करते हैं। भारत का कहना है कि ये इलाके उत्तराखंड का हिस्सा हैं और इस मुद्दे को आपसी बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए।
इससे पहले 10 जून को खनाल ने संसद में कहा था कि नेपाल और भारत के बीच, सीमा-पार कब्जे के मुद्दे को एक संयुक्त कार्य समूह देखेगा। उन्होंने इस विषय पर प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की टिप्पणियों को स्पष्ट करने की कोशिश की।
खनाल ने कहा था कि सीमा प्रबंधन पर नेपाल-भारत संयुक्त कार्य समूह की अगली बैठक अगस्त में भारत में होगी।
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