उच्च न्यायालय ने भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति की बर्खास्तगी रद्द करने वाले आदेश पर लगायी रोक

उच्च न्यायालय ने भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति की बर्खास्तगी रद्द करने वाले आदेश पर लगायी रोक

उच्च न्यायालय ने भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति की बर्खास्तगी रद्द करने वाले आदेश पर लगायी रोक
Modified Date: September 18, 2026 / 12:46 am IST
Published Date: September 18, 2026 12:46 am IST

लखनऊ, 17 सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बृहस्पतिवार को लखनऊ के ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर माहरुख मिर्जा की बर्खास्तगी को रद्द करने के एकल पीठ के फैसले पर रोक लगा दी।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने यह आदेश विश्वविद्यालय द्वारा दायर एक विशेष अपील पर दिया है।

यह अपील न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ के पिछले महीने पांच अगस्त के उस फैसले को चुनौती देने के लिये दाखिल की गयी थी जिसमें मिर्जा की बर्खास्तगी रद्द करने का आदेश दिया गया था।

दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि एकल पीठ ने न्यायिक समीक्षा की सीमाओं को नजरअंदाज करते हुए मिर्जा के खिलाफ आरोपों के गुण-दोष पर निष्कर्ष निकाले थे।

पीठ ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया तीन आरोपों से संबंधित निष्कर्ष, जैसे कि कथित तौर पर अनापत्ति प्रमाणपत्र में धोखाधड़ी, कथित अवैध नियुक्तियां और बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज न करना, दरअसल संदिग्ध थे।

पीठ ने कहा, ‘‘आरोपों की प्रकृति को देखते हुए और प्रथम दृष्टया तीन आरोपों से संबंधित निष्कर्ष संदिग्ध होने के कारण हमारी राय है कि विवादित फैसले पर रोक लगाई जानी चाहिए।’’

विशेष अपील को सुनवाई के लिए दो महीने बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है।

भाषा सं. सलीम गोला

गोला


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