लखनऊ, 27 फरवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के एक न्यायाधीश ने मंगलवार को अपने सामने एक ही दिन में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध मामलों की लंबी सूची से परेशान होकर फैसला लिखवाने में अपनी असमर्थता दर्ज कराई। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मैं भूखा, थका और निर्णय लिखाने में शारीरिक रूप से असमर्थ महसूस कर रहा हूं, इसलिए निर्णय सुरक्षित रखा जाता है।’’
न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने चंद्रलेखा सिंह की याचिका पर यह आदेश दिया। यह याचिका 2025 में डीआरटी के एक आदेश के खिलाफ दायर की गई थी।
उच्च न्यायालय ने मई 2025 में डीआरटी (कर्ज वसूली अधिकरण) के आदेश को रद्द कर दिया था और याचिकाकर्ता को सुनवाई का मौका देने के बाद मामले पर नए सिरे से फैसला करने का निर्देश दिया था।
उच्च न्यायालय के इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई थी, जिसने 25 अगस्त, 2025 को इस आधार पर उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया था कि संबंधित प्रतिवादी को नहीं सुना गया था।
उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय से याचिका पर जल्द से जल्द और बेहतर होगा कि छह महीने के अंदर नए सिरे से फैसला करने के लिए कहा था।
छह महीने का समय 24 फरवरी, 2026 को खत्म होने वाला था। असल में मंगलवार को न्यायमूर्ति विद्यार्थी के सामने 92 नए मामलों समेत कुल 235 मामले सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थे और वह शाम 4.15 बजे तक सिर्फ 29 नए मामलों की सुनवाई कर पाए।
लेकिन जब उन्हें उच्चतम न्यायालय द्वारा रिमांड पर लिए गए मौजूदा मामले के बारे में बताया गया, तो न्यायमूर्ति विद्यार्थी ने शाम 4.15 बजे मामले की सुनवाई शुरू की और शाम सात बजे तक जारी रखी।
मामले की मैराथन सुनवाई के बाद, जिसमें याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज कुदेसिया, संबंधित विपक्षियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप कुमार तथा केनरा बैंक की ओर से पी.के. श्रीवास्तव ने विस्तृत बहस की।
लंबी और विस्तृत सुनवाई के पश्चात न्यायाधीश ने स्वयं को पूर्णतः थका हुआ बताते हुए कहा कि वे तत्काल निर्णय लिखाने की स्थिति में नहीं हैं और इसलिए उन्होंने फैसला सुरक्षित रख लिया।
निर्णय सुरक्षित रखते हुए न्यायमूर्ति ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि उस दिन 92 ताजा मामले, 101 नियमित मामले, 39 ताजा विविध आवेदन तथा अतिरिक्त सूची में तीन मामले सूचीबद्ध थे। केवल क्रम संख्या 29 तक के ताजा मामलों की ही सुनवाई हो सकी।
उच्चतम न्यायालय के आदेश को ध्यान में रखते हुए इस मामले की सुनवाई अपराह्न सवा चार बजे प्रारंभ की गई और सात बजकर दस मिनट तक चली। उसके बाद न्यायाधीश विद्यार्थी ने कहा कि वह स्वयं को भूखा, थका एवं शारीरिक रूप से निर्णय लिखाने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं, इसलिए निर्णय सुरक्षित रखा जाता है।
भाषा सं आनन्द
सिम्मी संतोष
संतोष