राम मंदिर को दान दी गई 40 किलोग्राम चांदी का पता नहीं : ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रमुख

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राम मंदिर को दान दी गई 40 किलोग्राम चांदी का पता नहीं : ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रमुख

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  • Publish Date - June 20, 2026 / 10:38 PM IST,
    Updated On - June 20, 2026 / 10:38 PM IST

लखनऊ, 20 जून (भाषा) अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की हेराफेरी के आरोपों के बीच लखनऊ के एक जौहरी ने शनिवार को दावा किया कि उन्हें मंदिर को दान में दिए गए तीन किलोग्राम वजनी चांदी के दीपक और चांदी की अन्य वस्तुओं की मौजूदा स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के उत्तर भारत प्रमुख अनुराग रस्तोगी ने कहा कि उन्हें एसोसिएशन द्वारा भूमिपूजन (पांच अगस्त 2020) से पहले दान किए गए 39.26 किलोग्राम चांदी के सामान का भी कोई पता नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे परिवार की ओर से मैंने तीन किलोग्राम वजनी चांदी का दीपक ‘गुप्त दान’ के रूप में राम मंदिर को अर्पित किया था। इसके अलावा, आईबीजेए उत्तर भारत प्रमुख के रूप में हमने 30 चांदी की वस्तुएं (34.64 किलोग्राम) और चार चांदी की ईंटें (4.62 किलोग्राम) भी दान की थीं।’’

रस्तोगी ने बताया कि यह दान मार्च 2020 में उस समय किया गया था जब अयोध्या में रामलला की मूर्ति को अस्थायी संरचना में स्थानांतरित किया गया था। उन्होंने दावा किया कि यह दान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा की सहमति से किया गया था।

उन्होंने कहा कि बाद में उन्होंने और आईबीजेए से जुड़े अन्य सदस्यों ने भी चांदी के दान दिए, जिन्हें मंदिर निर्माण कार्य में उपयोग के लिए सौंपा गया था।

रस्तोगी के अनुसार, दान की गई चांदी को विधिवत पूजा के बाद ट्रस्ट कार्यालय में सौंपा गया था और इसकी रसीद भी दी गई थी, हालांकि तीन किलोग्राम वजनी चांदी के दीपक की कोई रसीद उन्हें नहीं मिली।

उन्होंने कहा कि उन्हें आशंका है कि भूमिपूजन के दौरान यह सामग्री स्थापित नहीं की गई, संभवतः प्रोटोकॉल कारणों से ऐसा हुआ होगा।

रस्तोगी ने कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि दान की गई चांदी कहां है-यह उपयोग में लाई गई, पिघलाई गई या सुरक्षित रखी गई है। उन्होंने कहा कि वे आवश्यकता पड़ने पर एसआईटी जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत दान को लेकर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन वे सामूहिक दान के रिकॉर्ड को लेकर चिंतित हैं।

यह मामला उस समय सामने आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर अयोध्या में प्राप्त दानों के कथित दुरुपयोग की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया है।

इससे पहले सात जून को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि मंदिर में दान की गई करोड़ों रुपये की राशि गायब है और इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की थी।

इस मुद्दे को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

भाषा

अरुणव, आनन्‍द रवि कांत