लखनऊ, 18 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि भारत एक दिन ‘ग्लोबल साउथ’ का नेतृत्व करेगा और शुल्क तथा कोई भी देश भारत को नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा।
भागवत की यह टिप्पणी अमेरिका के साथ हालिया शुल्क विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं।
राज्य की राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में पेशेवरों के साथ संवाद में भागवत ने कहा, “भारत एक दिन ‘ग्लोबल साउथ’ का नेतृत्व करेगा, शुल्क हम पर असर नहीं डालेंगे। भारत मजबूती से खड़ा रहेगा और किसी भी देश के सामने झुकेगा नहीं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ समय बाद सब कुछ फिर सामान्य हो जाएगा।”
इससे पहले लखनऊ विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में भागवत ने अमेरिका और चीन (चीन) पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिमी देशों की सोच शक्तिशाली बनने और बाधा बनने वालों को हटाने की है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक सद्भाव समाज की एकता की नींव है और संघ सभी विभाजनों से ऊपर उठकर राष्ट्र के लिए कार्य करता है।
भागवत ने कहा, “हिन्दू धर्म सच्चा मानव धर्म है। दुनिया में यदि कोई पंथ-निरपेक्ष समाज है तो वह हिन्दू समाज है। अनेक जाति-पंथ बताने से अच्छा है कि हम अपनी पहचान हिन्दू मानें।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जाति, भाषा की पहचान महत्वपूर्ण नहीं हैं। हम सब हिन्दू हैं यह भाव रखना होगा। जाति नाम की व्यवस्था धीरे-धीरे जा रही है। तरुण पीढ़ी के आचरण में यह दिख रहा है। संघ में किसी की जाति नहीं पूछी जाती है। सब हिन्दू सहोदर हैं, इस भाव से काम करते हैं। समाज से जाति को मिटाने के लिए जाति को भुलाना होगा। समाज में जिस दिन जाति-पाति को महत्व नहीं मिलेगा, उस दिन जाति पर राजनीति करने वाले नेता भी बदल जाएंगे।’’
उन्होने कहा, ‘‘दूर-दूर रहने वाले परिवार भावनात्मक रूप से जुड़े रह सकते हैं। हमें अपने बच्चों को नाते रिश्तेदारों, संबंधियों से मिलाते रहना चाहिए। परिवारों को वर्ष मे एक बार एकत्रित होना चाहिए। इससे परिवारों में पीढ़ियों का जुड़ाव बना रहता है। एक अच्छे परिवार से अच्छे समाज का निर्माण होता है।”
संयुक्त परिवारों के विघटन पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, ‘‘आधुनिकता हमारी प्रकृति में है, लेकिन हम पश्चिमीकरण के विरोधी हैं।’’
उन्होंने बच्चों को घर में ही धर्म और संस्कार की शिक्षा देने पर जोर दिया।
मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मंदिरों का संचालन भक्तों और धर्माचार्यों के हाथ में होना चाहिए और इस दिशा में विश्व हिन्दू परिषद कार्य कर रहा है।
भागवत ने कहा, ‘‘संघ व्यक्ति निर्माण का काम करता है और देश में पांच हजार गांवों को विकास के लिए चुना गया है, जिनमें से 333 गांवों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।’’
उन्होंने लोगों से किसी न किसी सामाजिक प्रकल्प से जुड़ने का आह्वान किया।
भाषा जफर मनीष खारी
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