Elderly couple seeks euthanasia: ‘साहब हमें इच्छा मृत्यु दे दो नहीं तो बेटा मार डालेगा’, बुजुर्ग पति-पत्नी ने कलेक्टर दफ्तर पहुंचकर लगाई गुहार

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Elderly couple seeks euthanasia : इन पैसों का 5 लाख का ब्याज भर चुका हूं। अब वही बेटा लेखपाल बन गया, तो हमारी हत्या की साजिश कर रहा है। ऐसी मौत से अच्छा है कि डीएम साहब हमें इच्छामृत्यु दे दें।'

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  • Publish Date - January 21, 2026 / 08:11 PM IST,
    Updated On - January 21, 2026 / 08:14 PM IST

Elderly couple seeks euthanasia, image source: ibc24

HIGHLIGHTS
  • लेखपाल के बुजुर्ग माता-पिता ने रोते हुए पहुंचे कलेक्ट्रेट 
  • मैंने छोटे बेटे देवेंद्र को खूब पढ़ाया-लिखाया : बाबूराम
  • बेटा लेखपाल बन गया, तो हमारी हत्या की साजिश कर रहा : बाबूराम
  • एडमिशन नहीं होने पर 60 हजार रुपए का लोन लिया

Kannauj News: कन्नौज जिले से ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरी मानवता को ही शर्मसार कर दिया है। डीएम से बुजुर्ग पति पत्नी बोले कि जिस बेटे को 60 हजार का लोन लेकर पढ़ाया। इन पैसों का 5 लाख का ब्याज भर चुका हूं। अब वही बेटा लेखपाल बन गया, तो हमारी हत्या की साजिश कर रहा है। ऐसी मौत से अच्छा है कि डीएम साहब हमें इच्छामृत्यु दे दें।’

लेखपाल के बुजुर्ग माता-पिता ने रोते हुए पहुंचे कलेक्ट्रेट

दरअसल, ये बातें कन्नौज कलेक्ट्रेट पहुंचे लेखपाल के बुजुर्ग माता-पिता ने रोते हुए कहीं। बुजुर्ग दंपति के हाथ में इच्छामृत्यु की मांग करते हुए लिखी हुई पट्टिका थी। दोनों ने डीएम ऑफिस में बेटे की प्रताड़ना की दास्तां बताई। इस पर डीएम ने जांच के आदेश दिए हैं।

मामला कन्नौज जिले के इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के भूड़पुरवा गांव के बाबूराम (78) और उनकी पत्नी (75) कमलेश कुमारी रहती हैं। बाबूराम ने बताया- मेरे 3 बेटे हैं। छोटा बेटा देवेंद्र लेखपाल है। 2016 में उसे नौकरी मिली थी। उसकी पोस्टिंग सिद्धार्थनगर जिले की इटवा तहसील में है। बड़े बेटे अनिल की पत्नी सरकारी टीचर है। अनिल फर्रुखाबाद के कमालगंज में पत्नी के साथ ही रहता है। जबकि मझला बेटा शिवानंद आर्थिक रूप से कमजोर है। वो मेरे साथ खेती में हाथ बंटाता है।

मैंने  छोटे बेटे देवेंद्र को खूब पढ़ाया-लिखाया : बाबूराम

उसने अपने छोटे भाई को पढ़ाने में बहुत मदद की। मैंने भी छोटे बेटे देवेंद्र को खूब पढ़ाया-लिखाया सीपीएमटी, मेडिकल प्रवेश परीक्षा और पीसीएस की तैयारी के लिए तमाम कोचिंगों में पैसा खर्च किया। ये पैसा मैंने और मंझले बेटे शिवानंद ने खेती में मेहनत करके दिया। बाद में देवेंद्र का लेखपाल पद पर सिलेक्शन हो गया। लेकिन, लेखपाल बनने के बाद उसका नेचर बदल गया। वो हम लोगों को अपना दुश्मन मानने लगा। बेटे के एडमिशन के लिए लोन लेकर केस लड़ रहा हूं।

एडमिशन नहीं होने पर 60 हजार रुपए का लोन लिया

बाबूराम ने बताया- कि साल 2001 में देवेंद्र का नवोदय में दाखिला होना था। लेकिन प्रिंसिपल ने एडमिशन लेने से मना कर दिया था। बेटे का एडमिशन नहीं होने पर मैं इलाहाबाद हाईकोर्ट चला गया। एक साल तक केस लड़ा। इसके लिए 60 हजार रुपए का लोन लिया था। वह लोन अब ब्याज समेत 3 लाख हो गया। मेरे लिए ये कर्ज चुका पाना मुश्किल हो रहा है। वो कर्जा अभी तक चुका नहीं पाया हूं। बाबूराम और उनकी पत्नी कमलेश कुमारी ने डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री को शिकायती पत्र सौंपते हुए कहा कि हम लोग ऐसी मौत नहीं मरना चाहते। बेहतर है कि हमें इच्छामृत्यु दे दी जाए।

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