लखनऊ अग्निकांड: आग से बचाव और आपातकालीन निकास के इंतजाम नहीं होने के आरोप,अब तक चार गिरफ्तार

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लखनऊ अग्निकांड: आग से बचाव और आपातकालीन निकास के इंतजाम नहीं होने के आरोप,अब तक चार गिरफ्तार

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  • Publish Date - June 23, 2026 / 03:24 PM IST,
    Updated On - June 23, 2026 / 03:24 PM IST

लखनऊ (उप्र), 23 जून (भाषा) उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज की इमारत में लगी आग में 15 लोगों की मौत के मामले में दर्ज प्राथमिकी में यह आरोप लगाया गया है कि इमारत को बिना आग से बचाव के इंतजाम, आपातकालीन निकास और धुआं निकालने की व्यवस्था न होने के बावजूद उसका व्‍यवसायिक उपयोग किया जा रहा था। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

पुलिस के अनुसार अलीगंज थाने में दर्ज प्राथमिकी में भारतीय न्‍याय संहिता की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या), 110 (गैर-इरादतन हत्या की कोशिश), 125 (लापरवाही भरा काम जिससे लोगों की जान को खतरा हो) और ‘उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा अधिनियम’ के तहत दर्ज मामले में चार आरोपियों और अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि जिन लोगों के नाम प्राथमिकी में हैं, उनमें इमारत का मालिक और पालतू जानवरों की देखभाल से जुड़ी दुकान व एनिमेशन केंद्र चलाने वाले लोग शामिल हैं। पुलिस ने सोमवार को ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए लोगों में राम कृष्ण उपाध्याय (43), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (62), तुषार कृष्ण जायसवाल (31) और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि उपाध्याय, शुक्ला और जायसवाल आग की जद में आयी इमारत के संयुक्त रूप से मालिक थे।

आरोपी रामकृष्ण उपाध्याय को मंगलवार को अलीगंज कोतवाली में लाया गया। उपाध्याय का एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। लेकिन पुलिस उसे अस्पताल से लेकर अलीगंज कोतवाली में पहुंची।

पुलिस के अनुसार चारों आरोपितों को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया है। इसके बाद चारों आरोपितों को अदालत में पेश किया जाएगा।

दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, अलीगंज सेक्टर-डी की तीन मंजिला इमारत में भूतल और पहली मंजिल पर पालतू जानवरों की देखभाल से जुड़ी दुकान सह क्लिनिक स्थित था, दूसरी मंजिल पर वीडियो गेमिंग जोन व थ्री डी एनिमेशन सेंटर और तीसरी मंजिल पर आईटी नेटवर्किंग ऑफिस था।

22 जून को दोपहर करीब 2:30 बजे पालतू जानवरों से जुड़ी क्लिनिक में आग लगी थी।

शिकायत में आरोप है कि इमारत मालिकों और संचालकों ने ‘आग से सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए थे और आने-जाने के लिए सिर्फ एक ही मुख्य रास्ता था। कोई दूसरा प्रवेश द्वार या आपातकालीन दरवाजा नहीं था।’

बिजली के इंतजाम अनियमित थे और धुआं निकालने के लिए कोई प्रणाली नहीं थी। वातानुकूलित मशीन की आउटडोर यूनिट व बिजली उपकरण असुरक्षित तरीके से लगे थे।

प्राथमिकी में कहा गया कि इन्हीं कमियों के चलते अग्निशमन दल, राज्‍य आपदा मोचक बल, राष्‍ट्रीय आपदा मोचक बल और पुलिस को दीवारें काटकर अंदर घुसना पड़ा।

आरोप है कि मालिकों-प्रबंधकों को पता था कि ऐसी आपातस्थिति में जान जा सकती है, फिर भी लापरवाही बरती गई।

आग में दम घुटने और जलने से 15 लोगों की मौत हुई और इस घटना में घायल हुए नौ लोग किंग जार्ज चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हैं।

वहीं, उप्र सरकार द्वारा गठित जांच दल (एसआईटी) ने मंगलवार सुबह जांच शुरू कर दी है। लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) प्रवीण कुमार ने बताया कि एसआईटी सात दिन में रिपोर्ट सौंपेगी।

भाषा आनन्‍द मनीषा संतोष

संतोष