वाराणसी, 14 जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर जारी पुनरुद्धार कार्य को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि तोड़फोड़ अभियान के दौरान अहिल्याबाई होलकर की लगभग 100 साल पुरानी मूर्ति को नुकसान पहुंचाया गया है।
जिला प्रशासन ने हालांकि इस आरोप को खारिज करते हुए बुधवार को बताया कि मूर्तियों को दोबारा लगाने के लिए सुरक्षित रखा गया है।
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि पुनरुद्धार का मकसद घाट पर सुविधाओं को बेहतर बनाना है।
उन्होंने बताया, “यह काम कच्चे हिस्से पर और पुरानी सीढ़ियों के पुनर्निर्माण के लिए किया जा रहा है। दीवारों में लगी कुछ कलाकृतियां व मूर्तियां इस प्रक्रिया के दौरान प्रभावित हुई हैं लेकिन उन्हें संस्कृति विभाग द्वारा सुरक्षित कर लिया गया है और काम पूरा होने के बाद उन्हें उनके मूल रूप में फिर से स्थापित किया जाएगा।”
यह विरोध प्रदर्शन पाल समाज समिति के सदस्यों के नेतृत्व में हुआ और इसे मराठी समुदाय के कुछ वर्गों और अन्य स्थानीय समूहों का भी समर्थन मिला।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुनरुद्धार के नाम पर बिना किसी पूर्व सूचना के घाट पर अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया गया, जिससे समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं।
पाल समाज समिति के पदाधिकारी महेंद्र पाल ने दावा किया कि मूर्ति लगभग एक सदी पुरानी थी और ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान उसे हटा दिया गया।
सनातन रक्षक दल के अध्यक्ष अजय शर्मा ने आरोप लगाया कि घाट पर कई प्रतिष्ठित मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया है और यह उनकी धार्मिक भावनाओं का अपमान है।
उन्होंने कहा, “इन मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा की गयी थी। प्राण प्रतिष्ठा का मतलब होता है कि यह सब प्रतिमाएं जीवित थीं। जीवित प्रतिमाओं को मशीनों से तोड़ा जाना देवताओं का अपमान है। प्रशासन कह रहा कि वह दोबारा उन मूर्तियों को स्थापित करेगा, लेकिन ये कैसे होगा?”
पूर्व पार्षद सुधीर देड़गे ने कहा कि देवी अहिल्या ने देश के कई शहरों में घाट और मंदिर बनवाये थे।
उन्होंने कहा कि काशी में घाट व मूर्तियों को तोड़ना गलत है और इसे लेकर धनगर समाज, पाल समाज व अन्य उपजातियों के प्रतिनिधियों की बैठक 15 जनवरी को बुलाई गई है, जिसमें आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।
इससे पहले, अधिकारियों ने बताया था कि मणिकर्णिका घाट के पूर्व निर्धारित नवीनीकरण के हिस्से के रूप में शुरू किए गए पुनरुद्धान कार्य को लेकर कोई गलतफहमी हुई है।
मौके पर पहुंचे उपजिलाधिकारी आलोक वर्मा ने बताया कि घाट के आसपास रहने वाले लोग विरोध नहीं कर रहे हैं और प्रशासन स्थिति का जायजा ले रहा है।
भाषा सं. जफर सलीम जितेंद्र
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