उप्र : मेरठ में पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने रोका

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उप्र : मेरठ में पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने रोका

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  • Publish Date - July 13, 2026 / 06:29 PM IST,
    Updated On - July 13, 2026 / 06:29 PM IST

मेरठ, 13 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में दलित युवती के परिजनों से मिलने जा रहे कांग्रेस सांसदों और नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को सोमवार को पुलिस ने काशी टोल प्लाजा पर रोक दिया। करीब पौने दो घंटे तक चली बातचीत के बाद प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिले बिना लौट गया और 27 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की घोषणा की।

टीपीनगर क्षेत्र से 15 मई को लापता हुई 20 वर्षीय दलित युवती का शव 17 मई को रोहटा क्षेत्र में मिला था।

प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद, तनुज पुनिया, राज्यसभा सदस्य करमवीर सिंह बौद्ध, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम तथा ओबीसी कांग्रेस (एआईसीसी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद सहित अन्य नेता शामिल थे।

काशी टोल प्लाजा पर पुलिस अधिकारियों से हुई बातचीत के दौरान कांग्रेस नेताओं ने पीड़ित परिवार से मिलने की अनुमति मांगी, लेकिन पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इसकी अनुमति नहीं दी। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस भी हुई।

वापसी के दौरान उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि अधिकारियों ने पहले मामले की जानकारी देने के नाम पर प्रतिनिधिमंडल को रोके रखा और बाद में कहा कि उन्हें पीड़ित परिवार से मिलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पहले भी पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, मामले की त्वरित जांच, शीघ्र आरोपपत्र दाखिल करने तथा त्वरित अदालत में मुकदमा चलाने की मांग की थी, लेकिन इन मांगों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

गौतम ने आरोप लगाया कि कुछ अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं को पीड़ित परिवार से मिलने की अनुमति दी गई, जबकि कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को रोक दिया गया।

उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने यह प्रस्ताव भी दिया था कि केवल चार सदस्यों को पुलिस अपने साथ पीड़ित परिवार तक ले जाए, लेकिन इसे भी स्वीकार नहीं किया गया।

उन्होंने मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि किसी अधिकारी ने हिरासत में किसी व्यक्ति के साथ मारपीट की है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

गौतम ने कहा कि कांग्रेस ने सड़क जाम करने या प्रदर्शन करने के बजाय शांतिपूर्वक लौटने का फैसला किया, क्योंकि वह संविधान और कानून-व्यवस्था में विश्वास रखती है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब 27 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेगी और संसद में भी इस मुद्दे को उठाएगी।

इससे पहले सांसद इमरान मसूद ने कहा कि पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए। उन्होंने एसएसपी को निलंबित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की।

सांसद तनुज पुनिया ने आरोप लगाया कि संबंधित पुलिस अधिकारी का दलितों और मुसलमानों के प्रति व्यवहार असंवैधानिक है। उन्होंने मुख्यमंत्री से संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

कांग्रेस के ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद ने राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस को पीड़ित परिवार के साथ संवेदनशील व्यवहार करना चाहिए।

राज्यसभा सदस्य करमवीर सिंह बौद्ध ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य राजनीति करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिले।

प्रतिनिधिमंडल को रोके जाने और कांग्रेस नेताओं के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए क्षेत्राधिकारी (दौराला) शिव ठाकुर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने आया था और वापस लौट गया।’’ उन्होंने इससे अधिक कोई टिप्पणी नहीं की।

मेरठ पुलिस के अनुसार, मामले के मुख्य आरोपी अंकुश कुमार (23) को 18 मई को गिरफ्तार किया गया था। साक्ष्य छिपाने के आरोप में एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया है।

भाषा

सं, जफर रवि कांत